समयसार गाथा ७प ] [ १०१ सम्यक् छे. तेथी चारित्रमोहना जे परिणाम थाय छे ते बधा पुद्गलना परिणाम छे एम ते जाणे छे. पुद्गल स्वतंत्रपणे तेमां व्यापीने तेनो कर्ता छे, जीव तेनो कर्ता नथी. जुदी चीजनो कर्ता जुदी चीज छे. विकार आत्माथी जुदी चीज छे तो तेनो कर्ता पण ज्ञायकथी भिन्न पुद्गल छे. आवी वात छे.
हवे कहे छे-‘तेथी पुद्गलद्रव्य वडे कर्ता थईने कर्मपणे करवामां आवतुं जे समस्त कर्मनोकर्मरूप पुद्गलपरिणाम तेने जे आत्मा, पुद्गलपरिणामने अने आत्माने घट अने कुंभारनी जेम व्याप्यव्यापकभावना अभावने लीधे कर्ताकर्मपणानी असिद्धि होवाथी, परमार्थे करतो नथी. परंतु (मात्र) पुद्गलपरिणामना ज्ञानने (आत्माना) कर्मपणे करता एवा पोताना आत्माने जाणे छे, ते आत्मा (कर्मनोकर्मथी) अत्यंत भिन्न ज्ञानस्वरूप थयो थको ज्ञानी छे.’
जुओ! घडो अने कुंभार ए बेने व्याप्यव्यापकभावनो अभाव होवाथी कर्ताकर्मपणुं नथी. तेम आत्माने अने विकारी परिणामने व्याप्यव्यापकभावनो अभाव छे माटे कर्ता- कर्मपणुं नथी. दया, दान, व्रत, भक्ति आदि परिणामनो आत्मा कर्ता नथी. परनी दया पाळवी एम परना कार्यनो तो आत्मा कर्ता नथी पण परनी दया पाळवानो जे विकल्प ऊठयो तेनोय ए कर्ता नथी.
प्रश्नः– ‘दयावरं धम्मं’ धर्म तो दया प्रधान छे एम शास्त्रोमां आवे छे ने?
उत्तरः– हा, पण दया कोने कहेवी एनी लोकोने खबर नथी. रागनी उत्पत्तिनो अभाव तेनुं नाम दया छे, तेनुं नाम अहिंसा छे. आत्मा शुद्ध चैतन्यघन वस्तु छे. तेना आश्रये, तेमां स्थिर थतां वीतरागी पर्यायनी उत्पत्ति थवी तेने दयाधर्म कहे छे.
अहीं कहे छे के-जेम कुंभार अने घटने कर्ताकर्मनी असिद्धि छे तेम आत्मा अने पुद्गलपरिणाम जे विकारी कर्म ए बेने कर्ताकर्मपणुं नथी. जेम घटनो कर्ता कुंभार नथी तेम विकारी परिणामनो कर्ता आत्मा नथी. अहाहा...! भगवान आत्मा ज्ञानस्वभावी अखंड एकरूप वस्तु छे एवी ज्यां द्रष्टि थई अने एमां अंतर्लीन थयो त्यां विकारी परिणामनो आत्मा कर्ता थतो नथी. केमके वस्तु स्वभावे निर्विकार, निर्मळ छे अने पर्यायमां जे विकार छे तेने पुद्गलमां नाखी दीधो. द्रव्यना स्वभावनी द्रष्टि करी राग साथे कर्ताकर्मपणुं समाप्त करी दीधुं.
हवे मात्र पुद्गलपरिणामना ज्ञानने आत्माना कर्मपणे करता एवा पोताना आत्माने जाणे छे. राग थाय तेनुं जे ज्ञान थाय ते ज्ञान तो पोतानुं छे, स्वनुं छे. राग संबंधीनुं ज्ञान ते आत्मानो स्वपरप्रकाशक स्वभाव होवाथी आत्मानुं कर्म छे अने ते ज्ञानपरिणामनो आत्मा कर्ता छे. अहाहा...! राग संबंधीनुं जे ज्ञान ते ज्ञानने पोताना कर्मपणे करतो ते आत्माने जाणे छे, रागने जाणे छे एम नहि. आ अलौकिक वात छे, भाई! अत्यारे तो