समयसार गाथा ७प ] [ १०७ छे, अने ते धर्म छे. भगवान आत्मा पोते तीर्थस्वरूप छे. तेमां आरूढ थवुं ते जात्रा छे.
पुद्गलने अने आत्माने ज्ञेयज्ञायकसंबंधनो व्यवहार मात्र छे. एटले के राग ज्ञेय छे अने आत्मा ज्ञायक जाणनार छे. आ व्यवहाररत्नत्रय इत्यादि जे विकल्प छे ते पुद्गल छे. ते परज्ञेय छे अने आत्मा तेनो जाणनार ज्ञायक छे. रागना परिणाम जे पुद्गल छे तेनुं ज्ञान तो पोताना उपादानथी थयुं छे, रागना परिणाम तो तेमां निमित्त छे. ज्ञानमां राग निमित्त छे एवुं जे ज्ञान थयुं ते ज्ञातानुं व्याप्य कर्म छे. राग ज्ञानमां निमित्त छे माटे राग ज्ञातानुं व्याप्य कार्य छे एम नथी. अहो! गाथा शुं अलौकिक छे! मानो बार अंगनो सार भरी दीधो छे.
दया, दान, व्रत, भक्ति इत्यादि रागनुं ज्ञान थवामां ज्ञान पोते उपादान छे अने दया, दान, व्रत, भक्ति इत्यादि भाव ज्ञानमां निमित्त छे. निमित्त छे एटले बीजी चीज छे बस एटलुं ज. ते वखते ज्ञान पोताथी उत्पन्न थयुं त्यारे ते ते रागने निमित्त कहेवामां आवे छे. खरेखर ते निमित्त छे माटे ज्ञान थयुं छे एम नथी. निमित्तनुं-रागनुं ज्ञान कह्युं माटे निमित्त- राग कारण अने ज्ञान एनुं कार्य एम अर्थ नथी. स्वपरप्रकाशक ज्ञाननी परिणति स्वतंत्रपणे जीवद्रव्ये करी छे. ए ज्ञानपरिणति जीवनुं कर्म छे. अहाहा...! जेवुं जेवुं (रागादि विकल्पो) निमित्त छे तेवुं ज्ञान अहीं पोताथी (निज उपादानथी) स्वतंत्रपणे थयुं छे. ते ज्ञान ज ज्ञायकनुं-आत्मानुं व्याप्य कर्म छे. (राग आत्मानुं व्याप्य नथी). अहो! गजब वात करी छे! निमित्त-उपादान अने निश्चय-व्यवहारना बधा खुलासा आवी जाय छे. व्यवहारनुं जे ज्ञान थयुं ए ज्ञानमां व्यवहार निमित्त होवा छतां ए ज्ञातानुं व्याप्य नथी, जे ज्ञान थयुं ते ज्ञान ज ज्ञातानुं व्याप्य छे. तत्त्वद्रष्टिनो विषय आवो सूक्ष्म छे, भाई!
आ मकानादि अमे करीए ए मान्यता तो मिथ्यादर्शन छे. मकान मकानथी (थवा काळे) थाय अने राग रागथी थाय. राग थाय ते आत्माथी नहि, अने राग छे माटे तेनुं आत्मामां ज्ञान थयुं एम पण नहि. ज्ञानमां राग निमित्त छे पण निमित्तथी ज्ञान थयुं छे एम नथी. ज्ञाननी पर्याय स्वतंत्र पोताथी थई त्यारे आने (रागने) निमित्त कहेवामां आवे छे. उपादान पोताना स्वभावे ज्यां जाग्रत थाय छे ते काळे ते ते ज्ञानना परिणाममां ते ते राग निमित्त होवा छतां ते राग आत्मानुं व्याप्य नथी, ज्ञानना परिणाम ज आत्मानुं व्याप्य कर्म छे. निश्चयमोक्षमार्ग जे छे ते आत्मानुं व्याप्य छे. व्यवहार मोक्षमार्ग छे ते निमित्त छे. निमित्त होवा छतां व्यवहार मोक्षमार्ग आत्मानुं व्याप्य छे एम नथी. केटली स्पष्ट वात छे!
व्यवहारनो राग आवे, पण ए पुद्गलना परिणाम छे. ज्ञानमां, पोताने जाणतां एने जाणवानो स्वभाव छे. परंतु ए ज्ञानना परिणाम पोताना शुद्ध उपादानथी थया