Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा ७७ ] [ १३१ जे स्वपरप्रकाशकपणे ज्ञानभावे परिणमे छे ते ज्ञानपरिणामनो आत्मा कर्ता छे; रागनो (शुभभावनो) कर्ता नथी. रागने-शुभभावने जाणवाना जे परिणाम थया तेनो आत्मा कर्ता छे. आ वस्तुस्थिति छे.

भाई! आवी वस्तुस्थितिनो अंदर निर्णय न करे त्यां सुधी धर्मनी शरूआत केम थाय? श्रद्धा-ज्ञान-रमणताना जे आत्मपरिणाम तेने ग्रहतो, ते-रूपे परिणमतो अने ते-रूपे ऊपजतो थको ते परिणामने आत्मा करे छे. ग्रहतो ए प्राप्य, परिणमतो ए विकार्य अने ऊपजतो ए निर्वर्त्य कर्म थयुं. अहीं तो अत्यारे परथी भिन्न पाडवानी वात छे. पर्यायथी द्रव्य भिन्न छे अने पर्याय पर्यायने करे छे ए वात अहीं सिद्ध करवी नथी. खरेखर तो एम छे के पर्याय पर्यायने करे छे, द्रव्य करतुं नथी. परंतु अहीं तो पररूपे परिणमतो नथी अने स्वपणे परिणमे छे एवो आत्मा पोताना परिणामने करे छे एम अहीं साबीत करवुं छे.

भाई! स्वभावद्रष्टि करवानी आ वात छे. अशुभथी बचवा शुभभाव भले हो; शुभ छोडीने अशुभ करवा एम अहीं वात नथी. शुभनी रुचि छोडीने द्रव्यनी रुचि कर-एम अहीं वात छे. सर्वथा शुद्धोपयोग थाय त्यारे शुभ छूटी जाय छे. शुभोपयोगनी दशा ए धर्मीनी (धर्मनी) दशा नथी, जे जाणवाना परिणाम थाय ते धर्मनी दशा छे अने तेनी आदिमां आत्मा छे. आत्मा कर्ता थईने जाणवाना परिणामने करे छे, ते-रूपे परिणमे छे, ते- रूपे ऊपजे छे.

हवे कहे छे-‘आम आत्मा वडे करवामां आवतुं जे आत्मपरिणाम तेने ज्ञानी जाणतो होवा छतां, जेम माटी पोते घडामां अंतर्व्यापक थईने आदि-मध्य-अंतमां व्यापीने, घडाने ग्रहे छे, घडारूपे परिणमे छे अने घडारूपे ऊपजे छे तेम, ज्ञानी पोते बाह्यस्थित एवा परद्रव्यना परिणाममां अंतर्व्यापक थईने, आदि-मध्य-अंतमां व्यापीने, तेने ग्रहतो नथी, ते- रूपे परिणमतो नथी अने ते-रूपे ऊपजतो नथी.’

जुओ, सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान अने शांतिना जे परिणाम थया तेने ग्रहतो, ते-रूपे परिणमतो अने ते-रूपे ऊपजतो आत्मा पोताना परिणामने करे छे; पण व्यवहारना परिणामने आत्मा करतो नथी. पोताना परिणामने जाणता एवा आत्माने पर साथे कर्ताकर्मसंबंध नथी. व्यवहारनो शुभराग छे तेथी अहीं आत्मपरिणाम थया छे एम नथी. तथा व्यवहारने जाणे छे तेथी ते व्यवहारनो कर्ता छे एम पण नथी. आत्माना आश्रये थयेला परिणामनो कर्ता, ग्रहनार, परिणमनार आत्मा छे.

जुओ, प्रश्न एम हतो के पोताना निर्मळ परिणामने जाणतो होवा छतां ते रागना कार्यनो कर्ता छे के नहि? आत्मा जाणवानुं कार्य तो करे छे; तो रागनो कर्ता थईने भेगुं रागनुं कार्य करे छे के नहि? एक गायनो गोवाळ ते पांच गायनो गोवाळ-एम