१४४ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४ पुद्गलपरिणामनुं फळ जे सुखदुःखादि तेने पुद्गल जाणतुं नथी. आम आत्माना परिणाम, पुद्गलना परिणाम अने पुद्गलपरिणामना फळने-ए त्रणेने पुद्गल जाणतुं नथी; केमके ए जड छे. तो आवा पुद्गलद्रव्यने जीव साथे कर्ताकर्मभाव छे के नथी?
आगळनी ७६-७७-७८ गाथाओमां एम हतुं के-
पुद्गलकर्मना भावने जाणता एवा आत्माने पुद्गल साथे कर्ताकर्मभाव छे के नथी? आ एक वात करी.(७६)
पोताना निर्मळ परिणामने जाणता एवा जीवने पुद्गल साथे कर्ताकर्मभाव छे के नथी? आ बीजी वात करी.(७७)
पुद्गलकर्मना फळने जाणता एवा जीवने पुद्गल साथे कर्ताकर्मभाव छे के नथी? आ त्रीजी वात करी.(७८)
हवे अहीं चोथी वात करे छे के जीवना परिणामने, पोताना परिणामने अने पोताना परिणामना फळने नहि जाणता एवा पुद्गलद्रव्यने जीव साथे कर्ताकर्मभाव छे के नथी? राग कर्ता अने आत्मा रागनुं कार्य-एवो कर्ताकर्मभाव छे के नथी? आवुं समजवानी जिज्ञासा थई छे एवा शिष्यने अहीं उत्तर आपे छेः-
जुओ, अहीं आ गाथामां ‘परद्रव्यनी पर्याय’ एम शब्द छे एनो अर्थ आत्मानी निर्मळ पर्याय एम थाय छे. आ पहेलांनी त्रण गाथाओमां ‘परद्रव्य पर्याय’ एटले राग अने हरखशोकनी पर्यायनी वात हती. अहा! संतोए केवी करुणा करीने सत्य जाहेर कर्युं छे! सर्वज्ञ भगवाने कहेली वात जगत समक्ष जाहेर करी छे. कहे छे-
‘माटी पोते घडामां अंतर्व्यापक थईने, आदि-मध्य-अंतमां व्यापीने घडाने ग्रहे छे, घडारूपे परिणमे छे अने घडारूपे ऊपजे छे.’ माटे माटी कर्ता छे अने घडो माटीनुं कर्म छे, कुंभारनुं नहि. केटलाक कहे छे के बे कर्ता होय त्यारे सामग्री पूरी थाय छे. घडाना बे कर्ता-एक माटी अने बीजो कुंभार-आम बे कर्ता वडे घडारूपी कार्य थाय एम कहे छे तेनो अहीं निषेध करे छे. घडारूपी कार्य माटीथी पोताथी ज थयुं छे तेमां कुंभार जे निमित्त छे तेने तो आरोप करीने कर्ता कहेवामां आवे छे. खरेखर निमित्ते कार्य कर्युं छे एम छे ज नहि. वास्तविकपणे निमित्त परना कार्यनो कर्ता छे ज नहि.
घडानो कर्ता कुंभार त्रणकाळमां नथी. तेम शरीरनी, भाषानी जे अवस्था थाय, दाळ, भात, रोटलीनी खावानी जे क्रिया थाय ते क्रियाने ते ते काळे ज्ञानी ते प्रकारना पोताना ज्ञानना परिणामथी जाणे छे, परंतु ते कार्यनो ते कर्ता नथी. जुओ, आ पुस्तक