१प६ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४
निश्चयमां अनारूढ छे ते भगवान समयसारने अनुभवता नथी एम त्यां कह्युं छे. अहो! कुंदकुंदाचार्य अने अमृतचंद्राचार्य भगंवतोए अपार करुणा करी छे. तेमने करुणानो विकल्प ऊठयो अने कोई धन्य पळे आ शास्त्रो लखाई गयां छे. भव्य जीवोनां महाभागय के आवी चीज भरतमां रही गई.
एमां कहे छे के व्यवहारनो जे राग छे तेनाथी ज्ञानस्वरूप मारी चीज भिन्न छे एम जे जाणे छे तेने जीव-पुद्गलना कर्ता-कर्मपणानी बुद्धि रहेती नथी. पुद्गलनो अर्थ अहीं राग थाय छे. ७प मी गाथामां जडनी दशा अने राग ए बधाने पुद्गलपरिणाम कह्या छे. धर्मी जीवने भेदज्ञान थयुं छे तेथी राग जे थाय तेने ते जाणे छे, पण राग मारु कार्य छे अने हुं तेनो कर्ता छुं एम ते मानतो नथी.
जुओ, एक शेठ हता. तेमने रोज चुरमाना लाडु ज खावानी टेव. एकवार घरमां जुवान दीकरानुं मरण नीपजयुं. रोटला-रोटली शेठने जराय अनुकूळ नहि. एटले घरनां कुटुंबीओ कहे के भाई! तमारा स्वास्थ्यने लाडु सिवाय बीजुं कांई अनुकूळ नथी माटे लाडु जमो. अहा! एक बाजु जुवान दीकरो मरी गयो छे, आंखमां आंसुनी धारा छे अने ए चुरमाना लाडु खाय छे. पण ते वखते लाडु उपर प्रेम नथी. एम धर्मीने राग आवे पण ए रागनो एने प्रेम नथी. परनो प्रेम तो होय ज शेनो? अहाहा...! अंदर चैतन्यमूर्ति भगवान ज्ञायकस्वरूप अनंत आनंदनी संपदाथी भरेलो प्रभु छे. एनी रुचिमां ज्ञानने रागथी जुदुं पाडयुं छे तेथी राग मारुं कर्तव्य अने रागनो हुं कर्ता एवी बुद्धि एने उडी गई छे. भाई! आ भवमां समजवानुं अने करवानुं आ छे.
प्रश्नः– आप व्यवहार बधो करो छो अने वळी व्यवहारने हेय पण कहो छो ए केवी रीते छे?
उत्तरः– अरे भगवान व्यवहार कोण करे? तथापि व्यवहार आवे तो खरो ने? भगवाननां पूजा-भक्ति करवां, शास्त्र स्वाध्याय करवुं इत्यादि यथासंभव होय तो खरां पण ए बधुं हेयबुद्धिए होय छे एम वात छे. जुओने, केटलुं कह्युं छे! राग साथे एकताबुद्धि रहे त्यां सुधी रागनो हुं कर्ता अने राग मारुं कर्तव्य एवी मिथ्या मान्यता होय छे. परंतु रागथी भिन्न पडीने ज्यां शुद्ध आत्माने-भगवान ज्ञायकने जाण्यो त्यां भेदज्ञानना काळमां जीव अने पुद्गल एटले राग साथे एने कर्ताकर्मपणानी बुद्धि रहेती नथी. भाई! राग धर्मीने होय खरो, पण रागनो प्रेम-आदर एने होतां नथी. माटे हे भाई! व्यवहारथी लाभ (धर्म) थशे एवी मान्यता तुं छोडी दे. व्यवहारनी रुचि ज्यां लगी छूटशे नहि त्यां लगी भेदज्ञान प्रगट थशे नहि.
बंध अधिकारमां कळश १७३ मां आवे छे के-“सर्व वस्तुओमां जे अध्यवसान थाय छे ते बधांय जिन भगवानोए पूर्वोक्त रीते त्यागवा योग्य कह्यां छे तेथी अमे