Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१७४ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४

अने जीवने व्याप्यव्यापकभावना अभावने लीधे कर्ताकर्मपणानी असिद्धि होवाथी, जीव ज पोते अंतर्व्यापक थईने ससंसार अथवा निःसंसार अवस्थाने विषे आदि-मध्य-अंतमां व्यापीने ससंसार अथवा निःसंसार एवा पोताने करतो थको, पोताने एकने ज करतो प्रतिभासो परंतु अन्यने करतो न प्रतिभासो; अने वळी तेवी रीते आ ज जीव, भाव्यभावकभावना अभावने लीधे परभावनुं पर वडे अनुभवावुं अशकय होवाथी, ससंसार अथवा निःसंसाररूप पोताने अनुभवतो थको, पोताने एकने ज अनुभवतो प्रतिभासो परंतु अन्यने अनुभवतो न प्रतिभासो. भावार्थः– आत्माने परद्रव्य-पुद्गलकर्म-ना निमित्तथी ससंसार-निःसंसार अवस्था छे. ते अवस्थारूप आत्मा पोते ज परिणमे छे. तेथी ते पोतानो ज कर्ता-भोक्ता छे; पुद्गलकर्मनो कर्ता-भोक्ता तो कदी नथी. * * *

समयसार गाथा ८३ः मथाळुं

तेथी ए सिद्ध थयुं के जीवने पोताना ज परिणामो साथे कर्ताकर्मभाव अने भोक्ताभोग्यभाव छे. बंधमार्ग अने मोक्षमार्ग बन्नेनो कर्ता आत्मा स्वतंत्र छे एम हवे सिद्ध करे छेः- * गाथा ८३ः टीका उपरनुं प्रवचन * जुओ, अप्पाणमेव हि करेदि–एम (गाथामां) पाठमां छे ने? मतलब के विकारी अने निर्विकारी पर्यायने आत्मा करे छे. सवारे एम आव्युं हतुं के आत्मा मोक्षमार्गनी पर्यायने पण करतो नथी. ए तो त्यां वस्तुनो-आत्मानो अकर्तास्वभाव सिद्ध कर्यो छे. अहीं तो कर्तापणानी वात करे छे. आत्मा परनो कर्ता नथी अने पर कर्ता थइने आत्मामां कांइ करतुं नथी ए वात अहीं सिद्ध करवी छे. तेथी कहे छे के मोक्षमार्गनी पर्याय अने रागनी विकारी पर्यायनो कर्ता जीव छे, कर्म नहि. भाइ! आ तारी स्वतंत्रतानो ढंढेरो पीटयो छे. माटे कर्मथी थाय अने रागथी थाय एवी विपरीतता छोडी दे. विपरीत परिणामनुं फळ आकरुं आवशे. बापा! ‘जेम उत्तरंग अने निस्तरंग अवस्थाओने पवननुं वावुं अने नहि वावुं ते निमित्त होवा छतां पण पवनने अने समुद्रने व्याप्यव्यापकभावना अभावने लीधे कर्ताकर्मपणानी असिद्धि छे.’ दरियामां तरंग उठे तेने उत्तरंग कहे छे अने तरंग विलय पामे तेेने निस्तरंग (तरंग रहित) कहे छे. दरियामां तरंग उठे त्यारे पवननुं वावुं निमित्त छे अने ज्यारे तरंग विलय पामे त्यारे पवननुं नहि वावुं निमित्त छे. पवननुं वावुं निमित्त छे एटले ए (पवननुं वावुं) तरंगने उठावे छे एम नथी. तथा पवननुं नहि वावुं तरंगने शमावी दे छे एम नथी. पवन अने समुद्रने व्याप्यव्यापकभावनो अभाव छे. एटले पवन