Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा ८३ ] [ १७७

अभावनी अपेक्षा नथी. केवळज्ञाननी अवस्थामां घनघाती कर्मना अभावनुं निमित्त होवा छतां घातीकर्मनो अभाव थयो माटे केवळज्ञान थयुं छे एम नथी.

गोम्मटसारमां (गाथा १९७मां) आवे छे के पोताना भाव कलंकनी प्रचुरताना कारणे निगोदना जीवो निगोदने छोडी नीकळता नथी. कर्मनुं जोर छे माटे बहार आवता नथी एम त्यां नथी कह्युं. संसारयुक्त अवस्था चाहे भवि जीवनी हो के अभविनी, ते अवस्थानो जीव पोते कर्ता छे अने ते अवस्था जीवनुं पोतानुं कर्म छे एटले कार्य छे. संसार अवस्थामां कर्मना विपाकनुं निमित्त छे, परंतु कर्मनुं निमित्त जीवना मिथ्यात्वादि परिणामनुं कर्ता अने मिथ्यात्वादि परिणाम एनुं कार्य-एम नथी. मिथ्यात्वना भाव छे ते संसारभाव छे अने दर्शनमोहनो उदय तेमां निमित्त छे. परंतु दर्शनमोहनो उदय मिथ्यात्वभावनो कर्ता अने मिथ्यात्वभाव एनुं व्याप्य कर्म-एम कदीय नथी. केटलुं स्पष्ट कर्युं छे! निमित्त हो भले, पण निमित्तथी कार्य थाय छे एम त्रणकाळमां नथी. अहाहा..! घडो माटीथी थयो छे; कुंभारथी थयो छे एम अमे देखता नथी एम आचार्य भगवान कहे छे.

प्रश्नः– आ आपना उपदेशथी अमने समजाय छे ने?

उत्तरः– एम छे नहि. पोते पोतानी योग्यताथी समजे तो समजाय छे, परथी नहि. जो परथी समजाय तो पूर्व भगवानना समोसरणमां अनंतवार गयो, छतां पोते केम ना समज्यो? काळलब्धि पाकी नहि माटे-एम जो कोइ कहे तो एनो अर्थ ज ए थयो के पोते ऊंधो पुरुषार्थ कर्यो माटे समज्यो नहि; ऊंधो परुषार्थ ए एनी काळलब्धि छे अने जीव तेनो स्वतंत्र कर्ता छे. स्वामी कार्तिकेयानुप्रेक्षामां आवे छे के प्रत्येक द्रव्यनी प्रत्येक समये जे पर्याय थाय छे-विकारी के अविकारी-ते तेनी काळलब्धि छे, अने ते ज पर्याय त्यां थाय छे. पर्यायनी उत्पत्तिना काळे ते पर्याय पोताथी थाय छे, परना कारणे नहि.

प्रश्नः– कार्य थवामां बे कारण होय छे एम कह्युं छे ने?

उत्तरः– हा, कह्युं छे. परंतु तेमां वास्तविक कारण एक(उपादान) ज छे. बीजुं (निमित्त) तो उपचरित्त कारण छे. जेम अंदर मोक्षमार्ग एक ज छे तेम. पंडितप्रवर श्री टोडरमलजीए मोक्षमार्गप्रकाशकामां अत्यंत स्पष्ट कर्युं छे के-मोक्षमार्ग बे नथी, तेनुं निरूपण बे प्रकारथी छे. पोताना स्वभावना आश्रये जे मोक्षमार्ग जे मोक्षमार्ग प्रगट कर्यो ते निश्चय, अने तेनी साथे जे देव-गुरु-शास्त्रनी श्रद्धानो विकल्प, पंचमहाव्रतनो विकल्प, शास्त्र भणवानो विकल्प इत्यादि निमित्तपणे सहचर होय छे तेने साथे थतो देखीने उपचारथी मोक्षमार्ग कहे छे, पण ते मोक्षमार्ग छे नहि. तेम कथनमां आवे के कार्यनां कारण बे छे, परंतु खरेखर कारण एक(उपादान) ज छे.