समयसार गाथा ८३ ] [ १७९
बन्ने पर्यायोनुं कर्ता आत्मद्रव्य नथी एम वात आवे. पण अहीं तो पर्यायनो कर्ता द्रव्य पोते छे. पर नथी एम सिद्ध करवुं छे.
परद्रव्यने मानी स्वच्छंदी थाय तेने ते मान्यता छोडाववा विकार पोते करे छे एम कह्युं. हवे ज्यारे विकार अने द्रव्य स्वभाव वच्चे भेदज्ञान कराववानी वात होय त्यारे विकारनुं कर्ता द्रव्य नथी, पण पर्याय पोते पोताथी विकार स्वतंत्रपणे करे छे एम वात आवे. बन्नेनुं तात्पर्य एक वीतरागता ज छे.
केवळी भगवान निश्चयथी त्रणकाळ त्रणलोकने देखता नथी, पण पर्यायने देखतां तेमां त्रणकाळ त्रणलोक देखवामां आवी जाय छे. जेम रात्रे नदीनुं स्वच्छ जळ होय तेमां चंद्र, ग्रह, नक्षत्रनुं प्रतिबिंब पडे छे. एक चंद्र, अठ्ठावीस नक्षत्र,अठ्ठासी ग्रह, ६६९७प क्रोडाक्रोडी तारा-ए बधुं नदीना स्वच्छ जळने देखतां थइ जाय छे. अंदर जे देखाय छे ते चंद्र, ग्रह, नक्षत्र आदि नथी, देखाय छे ए तो जळनी अवस्था छे. तेम नित्यानंद ज्ञानस्वभावी भगवान आत्माने, पोतानी ज्ञान-अवस्था के जेमां लोकालोक झळकया छे तेने देखे छे त्यां लोकालोक सहज देखाय जाय छे. जेने ते देखे छे ए तो ज्ञाननी अवस्था छे, लोकालोक नथी; पण ज्ञाननी अवस्थामां लोकालोक झळकया छे तेथी भगवान लोकालोकने देखे छे एम असद्भूत व्यवहारनयथी कहेवामां आवे छे. केमके लोकालोक परज्ञेय छे. पोतानी पर्यायने देखतां एमां लोकालोक संबंधीनुं ज्ञान आवी जाय छे. परंतु लोकालोक छे तो केवळज्ञान थयुं छे एम नथी.
शास्त्रमां आवे छे के लोकालोक केवळज्ञानमां निमित्त छे अने केवळज्ञान लोकालोकने निमित्त छे. एनो अर्थ ए छे के लोकालोक संबंधी ज्ञान थयुं ते पोताथी थयुं छे, लोकालोकथी थयुं नथी. लोकालोकने केवळज्ञान निमित्त छे अने केवळज्ञानने लोकालोक निमित्त छे. एम अरसपरस निमित्त छे पण कर्ताकर्मपणुं नथी.
प्रभु! तारी स्वतंत्रता देख! भूलमां पण स्वतंत्र अने मोक्षमार्गमां पण तुं स्वतंत्र छे. भाइ! आवुं मनुष्यपणुं मळ्युं अने एमां यथार्थ तत्त्वनुं ज्ञान न कर्युं तो कयां जइश बापु?
प्रश्नः– कर्म बळवान छे ने?
उत्तरः– ना, बीलकुल नहि. भावकर्मने बळवान कह्युं छे. इष्टोपदेशमां आवे छे के भावकर्म एेटले विकारनुं जोर छे त्यारे निर्विकार दशानुं जोर नथी. (परंतु कर्म छे माटे निर्विकारी दशा प्रगट नथी एम नथी).