Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा ८प ] [ २१३

थई, परंतु एम छे नहि. आत्मज्ञानी स्त्री होय ते रोटली बनती वखते निमित्त छे पण निमित्तकर्ता नथी. रोटलीनी अवस्था तो एना कारणे थाय छे. तेमां जोग अने रागनो जे कर्ता छे एवा अज्ञानीने निमित्तकर्ता कहेवामां आवे छे. पण जेने रागनुं कर्तापणुं छूटी गयुं छे अने ज्ञाताद्रष्टास्वरूप भगवान आत्मा द्रष्टिमां आव्यो छे तेवा धर्मी जीवनो राग रोटली थवानी क्रियामां निमित्त छे, निमित्तकर्ता नहि. अने धर्मीने जे ज्ञान थयुं तेमां रोटलीनी पर्याय निमित्त छे. आ वात आगळ गाथा १००मां करेली छे.

आथी कोई एम कहे छे के उपादानवादीओ निमित्तनो आश्रय बहु ले छे अने कहे छे के निमित्तथी कार्य थतुं नथी. जुओने, आ परमागममंदिर २६ लाखना खर्चे थयुं ते शुं निमित्तना आश्रय विना थयुं?

अरे भाई! परने कोण करे? जगतमां आत्मानी के परमाणुनी जे क्रिया छे ते परिणामस्वरूप छे अने ते परिणामथी भिन्न नथी. परिणाम परिणामी द्रव्यथी भिन्न नथी. आ महासिद्धांत छे. माटे जे क्रिया छे ते पोताना द्रव्यथी थई छे अने बीजाथी थई नथी. ७६मी गाथामां प्राप्य, विकार्य अने निर्वर्त्य कर्मनी वात करी छे. पर्याय जे समये थवानी छे तेने ते समये द्रव्य प्राप्त करे छे माटे ते प्राप्य कर्म छे. ते पर्याय पूर्वनी पर्याय बदलीने थई माटे ते विकार्य कर्म छे; तथा ते नवी उत्पन्न थई माटे ते निर्वर्त्य कर्म छे. ते समये ते ज पर्याय थवानी छे माटे तेने ध्रुव कहे छे. आम परिणामस्वरूप क्रियानो कर्ता द्रव्य पोते छे केमके क्रियाथी द्रव्य अभिन्न छे. माटे क्रिया परथी कदी थती नथी.

आ होठ हले छे ते तेनी उत्पादरूप पर्याय छे. ते पर्याय पूर्वनी पर्याय बदलीने थई छे माटे ते क्रिया छे. ते क्रिया पोताना परिणामथी भिन्न नथी अने ते परिणाम तेना परमाणुथी भिन्न नथी. माटे ते पर्याय जीभथी थई नथी, ईच्छाथी थई नथी, आत्माथी थई नथी. आ श्वास चाले छे ते परमाणुनी क्रिया छे. ते क्रिया परिणामथी भिन्न नथी अने ते परिणाम तेना परमाणुथी भिन्न नथी. आम श्वास चाले छे तेनो कर्ता परमाणु छे, आत्मा नथी. आ मृत्यु समये श्वास अटकी जाय छे ते क्रिया परमाणुथी अभिन्न छे. ऊभो श्वास थाय त्यारे ते नाभिनुं स्थान छोडी दे छे. श्वास हेठो न बेसे अने एकदम देह छूटी जाय छे. पोताने ख्याल आवे के श्वासे स्थान छोडी दीधुं छे पण शुं करे? ते श्वासनी क्रिया उपर आत्मानो अधिकार नथी. जडनी क्रिया ते (आत्मा) केम करी शके?

लोकमां पण कहेवाय छे के-भाई! श्वास सगो नहि थाय. कारण के ते जडनी क्रिया छे. आत्मा तो जाणवाना परिणामनो कर्ता छे. श्वासनी क्रिया करवानी आत्मानी शक्ति नथी. भाई! श्वास तारी चीज नथी अने तारी चीजमां श्वास नथी. परमाणुनी क्रिया क्रियावानथी भिन्न नथी. छ ए द्रव्यनी क्रिया कर्ताथी भिन्न नथी, अभिन्न छे. आ