२१४ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४
महासिद्धांत भगवान कुंदकुंदाचार्य, श्री अमृतचंद्राचार्य आदि संतोए जगत पासे जाहेर कर्यो छे. श्वासनी क्रिया ते अजीवनी क्रिया छे. जीव तेने करी शके नहि, तेने हेठे लावी शके नहि. अरे भाई! जो श्वासनी क्रिया पण तुं करी शकतो नथी तो आ जे मोटां कारखानां चाले छे तेनी क्रिया तुं करी शके ए वात ज कयां संभवे छे? परमाणुनी पलटवानी जे क्रिया थाय ते क्रियावान पदार्थथी भिन्न नथी एटले के भिन्न वस्तुथी ते क्रिया थती नथी. आ प्रमाणे ज वस्तुनी स्थिति छे. हवे कहे छे-
‘आम, वस्तुस्थितिथी ज क्रिया अने कर्तानुं अभिन्नपणुं (सदाय) तपतुं होवाथी, जीव जेम व्याप्यव्यापकभावथी पोताना परिणामने करे छे अने भाव्यभावकभावथी तेने ज अनुभवे-भोगवे छे तेम जो व्याप्यव्यापकभावथी पुद्गलकर्मने पण करे अने भाव्यभावकभावथी तेने ज भोगवे तो ते जीव, पोतानी अने परनी भेगी मळेली बे क्रियाथी अभिन्नपणानो प्रसंग आवतां स्व-परनो परस्पर विभाग अस्त थई जवाथी, अनेक द्रव्यस्वरूप एक आत्माने अनुभवतो थको मिथ्याद्रष्टिपणाने लीधे सर्वज्ञना मतनी बहार छे.’
वस्तुनी मर्यादा ज एवी छे के वस्तुनी पर्याय पोतामां पोताथी थाय. ते परथी कदी थती नथी. दरेक पदार्थनी वर्तमान पर्याय बीजा द्रव्यनी पर्यायमां प्रवेश करीने तेने बदली दे एवी वस्तुस्थिति ज नथी. ‘ज’ लगाडयो छे तो एकांत थतुं नथी! ना, आ तो स्याद्वादमार्ग छे. पोतानी पर्याय पोताथी थाय अने परथी न थाय एनुं नाम एकांत छे. कथंचित्त पोताथी थाय अने कथंचित् परथी थाय एवी वस्तुस्थिति नथी. पोताथी पण थाय अने परथी पण थाय ए तो फुदडीवाद छे. गजब वात छे! रोटलीना टुकडा थाय ते परमाणुनी क्रिया छे; आंगळीथी टुकडा थाय एम छे ज नहि. रोटलीना टुकडा थाय ते टुकडा थवानी क्रिया छे. ते क्रियावान परमाणुथी भिन्न नथी; एटले के भिन्न पदार्थ वडे ते क्रिया थई नथी. जुओ, आ भेदज्ञाननी वात. कहे छे के कोईना घरमां कोई प्रवेश करे एवी मर्यादा नथी. पोतानी पर्यायमां बीजानी पर्याय प्रवेश करे अथवा बीजानी पर्यायमां पोतानी पर्याय प्रवेश करे एवी वस्तुनी मर्यादा नथी.
कुंभारथी घडो थाय एवी वस्तुनी मर्यादा नथी. घडानी पर्याय माटीथी थई छे. माटीना परमाणु पलटीने घडानी पर्याय थई ते क्रिया परिणामस्वरूप छे अने ते परिणामथी भिन्न नथी. अने ते घडारूप परिणाम द्रव्यथी (माटीना परमाणुथी) भिन्न नथी. अहो! भगवाननो कोई अद्भूत अलौकिक मार्ग छे! भगवाने मार्ग कर्यो नथी; जेवो छे तेवो मार्ग कह्यो छे. छए द्रव्य पोतपोतानी क्रियाना पोते कर्ता छे, परनो तेमां रंचमात्र हस्तक्षेप नथी. एक परमाणुमां-परमाणुनी क्रिया, क्रियावान भिन्न नथी, अभिन्न छे. आवी वस्तुनी मर्यादा छे. आत्मा रोटलीना टुकडा करी शके, दांत हलावी शके वा परनुं कांई करी शके ए वस्तुस्थिति ज नथी. परनुं कार्य करी शके ए आत्मानी शक्तिमां ज नथी.