समयसार गाथा ८प ] [ २१प
संयोगीद्रष्टिवाळाने देखाय के आत्मा हाथथी रोटलीना टुकडा करे छे; पण ए वस्तुस्थिति नथी. संयोगथी जोनार मिथ्याद्रष्टि वस्तुनी मर्यादाने तोडी नाखे छे. जुओ, भगवाने उपदेश आप्यो एम कहेवुं ए पण व्यवहारनयनुं कथन छे. वाणी वाणीना कारणे नीकळे छे; एमां ज्ञान निमित्त छे. वाणीनी पर्यायनो उत्पाद वाणीना परमाणुथी थाय छे, आत्माथी नहि, ईच्छाथी पण नहि. (भगवानने ईच्छा होती नथी).
धवलमां आवे छे के लोकालोक केवळज्ञानमां निमित्त छे. एनो अर्थ शुं? शुं केवळज्ञाननी पर्याय लोकालोकथी थई छे? ना, एम नथी. एम केवळज्ञाननी पर्याय लोकालोकने निमित्त छे. एटले शुं केवळज्ञान छे माटे लोकालोक छे? एम पण नथी, वळी लोकालोक तो ज्ञाननुं परज्ञेय छे अने स्वज्ञेय तो पोताना द्रव्य-गुण-पर्याय छे. आवुं वस्तुस्वरूप छे.
७पमी गाथामां आवी गयुं के आत्माना ज्ञानपरिणाममां राग निमित्त छे. आवुं जे ज्ञान ते जीवनुं कार्य छे, राग जीवनुं कार्य नथी. आ तो अंदर पोतामां लई जाय छे. ज्ञाननी पर्याय स्वपरप्रकाशक होवाथी ते परिणति स्वने जाणे छे अने रागने जाणे छे. राग छे तो रागने जाणे छे एम नथी. ज्ञाननी पर्याय पोताना स्वपरप्रकाशक सामर्थ्यनी स्वपरने जाणे छे. ज्ञाननी परिणतिमां धर्मी जीवने राग निमित्त छे. छतां धर्मी जीव पोतानी ज्ञाननी परिणतिने जाणे छे, रागने नहि. पोतानी ज्ञाननी पर्याय ते परिणामस्वरूप क्रिया छे, अने ते परिणाम द्रव्यथी अभिन्न छे. तेथी ते पर्यायनुं कर्ता आत्मद्रव्य छे; ते पर्यायनुं कर्ता निमित्त (राग) नथी.
अत्यारे तो मोटी गरबड चाले छे. परथी कार्य थाय ए मान्यता मूळमां ज भूल छे. स्वामीकार्तिकेयानुप्रेक्षामां लख्युं छे के प्रत्येक पदार्थनी ते समये थनारी पर्याय पोतानी काळलब्धिथी प्रगट थई छे. पर्यायनी ते जन्मक्षण छे. पर्यायनी उत्पत्तिनो स्वकाळ छे तेथी ते थई छे, निमित्त छे माटे ते थई छे एम नथी. प्रवचनसारनी गाथा १०२मां पर्यायनी जन्मक्षणनी आ ज वात करी छे. द्रव्यनी पलटती अवस्थाना काळे सहचर देखीने ते पर्याय निमित्तने लईने थई छे एवी जे मान्यता तेनो अहीं अति स्पष्ट निषेध कर्यो छे.
जुओ, आ लाकडी ऊंची थाय छे ते तेनी पलटवानी क्रिया छे. ते क्रिया परिणामस्वरूप होवाथी परिणामथी भिन्न नथी, अने परिणाम (लाकडीना) परमाणुथी भिन्न नथी. माटे ते क्रियानो करनारो ते ते परमाणु छे, आंगळी तेनो कर्ता नथी. आत्माए तो नहि, पण आंगळीए आ लाकडी ऊंची करी छे एम नथी. रोटली तावडीमां उनी थाय छे ते परमाणुनी क्रिया छे. ते ते परमाणुनी उष्ण थवानी योग्यताना कारणे रोटली उनी थाय छे; तवाथी नहि, अग्निथी नहि, के रोटलीने तवामां ऊंची-नीची फेरवनार बाईथी नहि. त्यां तावडीमां रोटलीनी ऊंची-नीची फरवानी जे क्रिया छे ते पण ते ते