२२६ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४
पर्याय थवानी होय ते ते क्षणे थाय ते एनी काळलब्धि छे एम तेमां कह्युं छे. प्रवचनसार, ज्ञेय अधिकारनी गाथा १०२मां प्रत्येक द्रव्यनी समय समयनी पर्यायनी जन्मक्षणनी वात कही छे. जे समये जे पर्याय थवानी होय ते थाय ते एनी जन्मक्षण छे. त्यां गाथा ९९मां पण कह्युं छे के दरेक पर्याय पोताना स्वअवसरे थाय छे, आगळपाछळ नहि. मोतीना हारनुं द्रष्टांत आपी त्यां समजाव्युं छे के -ज्यां ज्यां जे जे मोती छे त्यां त्यां पोताना स्थानमां छे, आगळपाछळ नथी. तेम आत्मामां अने जडमां क्रमसर जे जे पर्याय जे समये थवानी होय तेज ते समये थाय छे. मोती आगळपाछळ थतां नथी तेम द्रव्यनी प्रत्येक पर्याय आगळपाछळ थती नथी. आवुं वस्तुस्वरूप छे.
योगथी कंपननी क्रिया थाय अने प्रकृति-प्रदेश बंध थाय एम बे क्रिया एक द्रव्य करे एम बनतुं नथी. योगथी प्रकृति-प्रदेश बंध थाय छे अने कषायथी स्थिति-अनुभाग बंध थाय छे ए बधां निमित्तनां कथन छे. कर्मनुं संक्रमण थाय ते तेनी पोतानी योग्यताथी थाय छे, आत्माथी थतुं नथी. केवळज्ञान थाय त्यारे घातीकर्मोनी कर्मअवस्था बदली अकर्मरूप अवस्था थाय ते पोताथी थाय छे, ते क्रिया आत्मा करतो नथी.
अरे! भगवान! अत्यारे तो आनाथी आ थाय अने आनाथी ते थाय एवी गडबड ऊभी थई छे. पण भाई! ए मार्ग नथी. संतोए तो स्वतंत्रतानो ढंढेरो पीटयो छे. अहा! केवळज्ञाननी पर्याय ते काळे पोताथी उत्पन्न थवानी हती ते पोताना कारणे उत्पन्न थई छे. मोक्षमार्गना कारणे मोक्षनी पर्याय थई छे एम पण नथी. मोक्षमार्गनो व्यय थवानो क्रम हतो अने ते ज समये मोक्षपर्यायनो प्रगट थवानो क्रम हतो. त्यां मोक्षपर्याय स्वतंत्रपणे थई छे. शास्त्रमां एम आवे के पूर्वनी पर्याय पछीनी पर्यायनुं उपादान छे, एनो अर्थ शुं? पूर्वपर्यायनो व्यय थईने वर्तमान पर्याय प्रगट थई छे ते स्वतंत्रपणे थई छे. जैनतत्त्वमीमांसामां बहु सारुं स्पष्टीकरण कर्युं छे. पूर्वनी पर्यायनो व्यय थई पछीनी पर्याय प्रगटी छे ते कार्य छे अने पूर्वनी पर्याय तेनुं कारण छे-ए व्यवहारनयनुं कथन छे. बाकी तो जे द्रव्यनी जे पर्याय जे समये थवानी होय ते पोताना षट्कारकना परिणमनथी थाय छे. ते पर्याय द्रव्य-गुणथी थई नथी, पर निमित्तथी थई नथी अने पूर्वपर्यायना कारणे पण थई नथी. आवो स्वतंत्रतानो मार्ग छे!
जे काळे जे पर्याय थवानी होय ते काळे ते ज थाय एवो निर्णय कोने थाय? के जे पोताना ज्ञायकस्वभावनी सन्मुख थाय तेने आवो यथार्थ निर्णय थाय छे.
एक प्रश्न थयेलो के-भगवाने जोयुं छे ते प्रमाणे भव घटशे, आपणे शुं करी शकीए? अरे भाई! भगवाने जोयुं छे एम थशे एवो निर्णय कोणे कर्यो? जे केवळज्ञाननी एक समयनी पर्यायनी सत्तानो पोताना ज्ञानमां स्वीकार करे तेने स्वसन्मुखता थाय छे अने तेने भव होतो नथी. भगवाने तेना भव जोया नथी. केवळज्ञानीए जोयुं