कहानजैनशास्त्रमाळा ]
गाथार्थः — [कर्मफलम् वेदयमानः] कर्मना फळने वेदतो थको [यः तु] जे आत्मा [कर्मफलम्] कर्मफळने [आत्मानं करोति] पोतारूप करे छे ( – माने छे), [सः] ते [पुनः अपि] फरीने पण [अष्टविधम् तत्] आठ प्रकारना कर्मने — [दुःखस्य बीजं] दुःखना बीजने — [बध्नाति] बांधे छे.
[कर्मफलं वेदयमानः] कर्मना फळने वेदतो थको [यः तु] जे आत्मा [कर्मफलम् मया कृतं जानाति] ‘कर्मफळ में कर्युं’ एम जाणे छे, [सः] ते [पुनः अपि] फरीने पण [अष्टविधम् तत्] आठ प्रकारना कर्मने — [दुःखस्य बीजं] दुःखना बीजने — [बध्नाति] बांधे छे.
[कर्मफलं वेदयमानः] कर्मना फळने वेदतो थको [यः चेतयिता] जे आत्मा [सुखितः दुखितः च] सुखी अने दुःखी [भवति] थाय छे, [सः] ते [पुनः अपि] फरीने पण [अष्टविधम् तत्] आठ प्रकारना कर्मने — [दुःखस्य बीजं] दुःखना बीजने — [बध्नाति] बांधे छे.