Samaysar-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 388-389.

< Previous Page   Next Page >


Page 537 of 642
PDF/HTML Page 568 of 673

 

कहानजैनशास्त्रमाळा ]

सर्वविशुद्धज्ञान अधिकार
५३७
वेदंतो कम्मफलं मए कदं मुणदि जो दु कम्मफलं
सो तं पुणो वि बंधदि बीयं दुक्खस्स अट्ठविहं ।।३८८।।
वेदंतो कम्मफलं सुहिदो दुहिदो य हवदि जो चेदा
सो तं पुणो वि बंधदि बीयं दुक्खस्स अट्ठविहं ।।३८९।।
वेदयमानः कर्मफलमात्मानं करोति यस्तु कर्मफलम्
स तत्पुनरपि बध्नाति बीजं दुःखस्याष्टविधम् ।।३८७।।
वेदयमानः कर्मफलं मया कृतं जानाति यस्तु कर्मफलम्
स तत्पुनरपि बध्नाति बीजं दुःखस्याष्टविधम् ।।३८८।।
वेदयमानः कर्मफलं सुखितो दुःखितश्च भवति यश्चेतयिता
स तत्पुनरपि बध्नाति बीजं दुःखस्याष्टविधम् ।।३८९।।
जे कर्मफळने वेदतो जाणे ‘करमफळ में कर्युं’,
ते फरीय बांधे अष्टविधना कर्मनेदुखबीजने; ३८८.
जे कर्मफळने वेदतो आत्मा सुखी-दुखी थाय छे,
ते फरीय बांधे अष्टविधना कर्मनेदुखबीजने. ३८९.

गाथार्थः[कर्मफलम् वेदयमानः] कर्मना फळने वेदतो थको [यः तु] जे आत्मा [कर्मफलम्] कर्मफळने [आत्मानं करोति] पोतारूप करे छे (माने छे), [सः] ते [पुनः अपि] फरीने पण [अष्टविधम् तत्] आठ प्रकारना कर्मने[दुःखस्य बीजं] दुःखना बीजने[बध्नाति] बांधे छे.

[कर्मफलं वेदयमानः] कर्मना फळने वेदतो थको [यः तु] जे आत्मा [कर्मफलम् मया कृतं जानाति] ‘कर्मफळ में कर्युं’ एम जाणे छे, [सः] ते [पुनः अपि] फरीने पण [अष्टविधम् तत्] आठ प्रकारना कर्मने[दुःखस्य बीजं] दुःखना बीजने[बध्नाति] बांधे छे.

[कर्मफलं वेदयमानः] कर्मना फळने वेदतो थको [यः चेतयिता] जे आत्मा [सुखितः दुखितः च] सुखी अने दुःखी [भवति] थाय छे, [सः] ते [पुनः अपि] फरीने पण [अष्टविधम् तत्] आठ प्रकारना कर्मने[दुःखस्य बीजं] दुःखना बीजने[बध्नाति] बांधे छे.

68