Samaysar-Gujarati (Devanagari transliteration). Kalash: 246.

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समयसार
[ भगवानश्रीकुंदकुंद-

विजृम्भमाणचिदेकरसनिर्भरस्वभावसुस्थितनिराकुलात्मरूपतया परमानन्दशब्दवाच्यमुत्तममनाकुलत्व- लक्षणं सौख्यं स्वयमेव भविष्यतीति

(अनुष्टुभ्)
इतीदमात्मनस्तत्त्वं ज्ञानमात्रमवस्थितम्
अखण्डमेकमचलं स्वसंवेद्यमबाधितम् ।।२४६।।

भगवान एक पूर्णविज्ञानघन परमब्रह्ममां सर्व उद्यमथी स्थित थशे, ते आत्मा, साक्षात् तत्क्षण प्रगट थता एक चैतन्यरसथी भरेला स्वभावमां सुस्थित अने निराकुळ (आकुळता विनानुं) होवाने लीधे जे (सौख्य) ‘परमानंद’ शब्दथी वाच्य छे, उत्तम छे अने अनाकुळता - लक्षणवाळुं छे एवा सौख्यस्वरूप पोते ज थई जशे.

भावार्थःआ शास्त्रनुं नाम समयप्राभृत छे. समय एटले पदार्थ, अथवा समय एटले आत्मा. तेनुं कहेनारुं आ शास्त्र छे. वळी आत्मा तो समस्त पदार्थोनो प्रकाशक छे. आवा विश्वप्रकाशक आत्माने कहेतुं होवाथी आ समयप्राभृत शब्दब्रह्म समान छे; कारण के जे समस्त पदार्थोनुं कहेनार होय तेने शब्दब्रह्म कहेवामां आवे छे. द्वादशांगशास्त्र शब्दब्रह्म छे अने आ समयप्राभृतशास्त्रने पण शब्दब्रह्मनी उपमा छे. आ शब्दब्रह्म (अर्थात् समयप्राभृतशास्त्र) परब्रह्मने (अर्थात् शुद्ध परमात्माने) साक्षात् देखाडे छे. जे आ शास्त्रने भणीने तेना यथार्थ अर्थमां ठरशे, ते परब्रह्मने पामशे; अने तेथी, जेने ‘परमानंद’ कहेवामां आवे छे एवा उत्तम, स्वात्मिक, स्वाधीन, बाधारहित, अविनाशी सुखने पामशे. माटे हे भव्य जीवो! तमे पोताना कल्याणने अर्थे आनो अभ्यास करो, आनुं श्रवण करो, निरंतर आनुं ज स्मरण अने ध्यान राखो, के जेथी अविनाशी सुखनी प्राप्ति थाय. आवो श्री गुरुओनो उपदेश छे.

हवे आ सर्वविशुद्धज्ञानना अधिकारनी पूर्णतानो कळशरूप श्लोक कहे छेः

श्लोकार्थः[इति इदम् आत्मनः तत्त्वं ज्ञानमात्रम् अवस्थितम्] आ रीते आ आत्मानुं तत्त्व (अर्थात् परमार्थभूत स्वरूप) ज्ञानमात्र नक्की थयुं[अखण्डम्] के जे (आत्मानुं) ज्ञानमात्र तत्त्व अखंड छे (अर्थात् अनेक ज्ञेयाकारोथी अने प्रतिपक्षी कर्मोथी जोके खंड खंड देखाय छे तोपण ज्ञानमात्रमां खंड नथी), [एकम्] एक छे (अर्थात् अखंड होवाथी एकरूप छे), [अचलं] अचळ छे (अर्थात् ज्ञानरूपथी चळतुं नथीज्ञेयरूप थतुं नथी), [स्वसंवेद्यम्] स्वसंवेद्य छे (अर्थात् पोताथी ज पोते जणाय छे), [अबाधितम्] अने अबाधित छे (अर्थात् कोई खोटी युक्तिथी बाधा पामतुं नथी).

भावार्थःअहीं आत्मानुं निज स्वरूप ज्ञान ज कह्युं छे तेनुं कारण आ प्रमाणे

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