Samaysar-Gujarati (Devanagari transliteration). 2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12,13.

< Previous Page   Next Page >


Page 611 of 642
PDF/HTML Page 642 of 673

 

कहानजैनशास्त्रमाळा ]

परिशिष्ट
६११

शक्तयः उत्प्लवन्ते आत्मद्रव्यहेतुभूतचैतन्यमात्रभावधारणलक्षणा जीवत्वशक्तिः १ अजडत्वात्मिका चितिशक्तिः २ अनाकारोपयोगमयी द्रशिशक्तिः ३ साकारोपयोगमयी ज्ञानशक्तिः ४ अनाकुलत्वलक्षणा सुखशक्तिः ५ स्वरूपनिर्वर्तनसामर्थ्यरूपा वीर्य- शक्तिः ६ अखण्डितप्रतापस्वातन्त्र्यशालित्वलक्षणा प्रभुत्वशक्तिः ७ सर्वभावव्यापकैक- भावरूपा विभुत्वशक्तिः ८ विश्वविश्वसामान्यभावपरिणतात्मदर्शनमयी सर्वदर्शित्वशक्तिः ९ विश्वविश्वविशेषभावपरिणतात्मज्ञानमयी सर्वज्ञत्वशक्तिः १० नीरूपात्मप्रदेशप्रकाशमान- लोकालोकाकारमेचकोपयोगलक्षणा स्वच्छत्वशक्तिः ११ स्वयम्प्रकाशमानविशदस्व- संवित्तिमयी प्रकाशशक्तिः १२ क्षेत्रकालानवच्छिन्नचिद्विलासात्मिका असङ्कुचितविकाशत्व-


कारणभूत एवा चैतन्यमात्रभावरूपी भावप्राणनुं धारण करवुं जेनुं लक्षण छे एवी जीवत्व नामनी शक्ति ज्ञानमात्र भावमांआत्मामांऊछळे छे.) १. अजडत्व- स्वरूप चितिशक्ति. (अजडत्व अर्थात् चेतनत्व जेनुं स्वरूप छे एवी चितिशक्ति.) २. अनाकार उपयोगमयी द्रशिशक्ति. (जेमां ज्ञेयरूप आकार अर्थात् विशेष नथी एवा दर्शनोपयोगमयीसत्तामात्र पदार्थमां उपयुक्त थवामयीद्रशिशक्ति अर्थात् दर्शन- क्रियारूप शक्ति.) ३. साकार उपयोगमयी ज्ञानशक्ति. (जे ज्ञेय पदार्थोना विशेषोरूप आकारोमां उपयुक्त थाय छे एवी ज्ञानोपयोगमयी ज्ञानशक्ति.) ४. अनाकुळता जेनुं लक्षण अर्थात् स्वरूप छे एवी सुखशक्ति. ५. स्वरूपनी (आत्मस्वरूपनी) रचनाना सामर्थ्यरूप वीर्यशक्ति. ६. जेनो प्रताप अखंडित छे अर्थात् कोईथी खंडित करी शकातो नथी एवा स्वातंत्र्यथी (स्वाधीनताथी) शोभायमानपणुं जेनुं लक्षण छे एवी प्रभुत्वशक्ति. ७. सर्व भावोमां व्यापक एवा एक भावरूप विभुत्वशक्ति. (जेम के, ज्ञानरूपी एक भाव सर्व भावोमां व्यापे छे.) ८. समस्त विश्वना सामान्य भावने देखवारूपे (अर्थात् सर्व पदार्थोना समूहरूप लोकालोकने सत्तामात्र ग्रहवारूपे) परिणमता एवा आत्मदर्शनमयी सर्वदर्शित्वशक्ति. ९. समस्त विश्वना विशेष भावोने जाणवारूपे परिणमता एवा आत्मज्ञानमयी सर्वज्ञ- त्वशक्ति. १०. अमूर्तिक आत्मप्रदेशोमां प्रकाशमान लोकालोकना आकारोथी मेचक (अर्थात् अनेक - आकाररूप) एवो उपयोग जेनुं लक्षण छे एवी स्वच्छत्वशक्ति. (जेम दर्पणनी स्वच्छत्वशक्तिथी तेना पर्यायमां घटपटादि प्रकाशे छे, तेम आत्मानी स्वच्छत्व- शक्तिथी तेना उपयोगमां लोकालोकना आकारो प्रकाशे छे.) ११. स्वयं प्रकाशमान विशद (स्पष्ट) एवा स्वसंवेदनमयी (स्वानुभवमयी) प्रकाशशक्ति. १२. क्षेत्र अने काळथी अमर्यादित एवा चिद्दविलासस्वरूप (चैतन्यना विलासस्वरूप) असंकुचितविकासत्व-