[यस्मात् ] क्योंकि [रूपं किंचित् न जानाति ] रूप कुछ जानता नहीं है, [तस्मात् ] इसलिये [ज्ञानम् अन्यत् ] ज्ञान अन्य है, [रूपं अन्यत् ] रूप अन्य है — [जिनाः ब्रुवन्ति ] ऐसा जिनदेव कहते हैं। [वर्णः ज्ञानं न भवति ] वर्ण ज्ञान नहीं है, [यस्मात् ] क्योंकि [वर्णः किंचित् न जानाति ] वर्ण कुछ जानता नहीं है, [तस्मात् ] इसलिये [ज्ञानम् अन्यत् ] ज्ञान अन्य है, [वर्णं अन्यं ] वर्ण अन्य है — [जिनाः ब्रुवन्ति ] ऐसा जिनदेव कहते हैं। [गंधः ज्ञानं न भवति ] गंध ज्ञान नहीं है, [यस्मात् ] क्योंकि [गंधः किंचित् न जानाति ] गंध कुछ जानती नहीं है, [तस्मात् ] इसलिये [ज्ञानम् अन्यत् ] ज्ञान अन्य है, [गंधं अन्यं ] गंध अन्य है — [जिनाः ब्रुवन्ति ] ऐसा जिनदेव कहते हैं। [रसः तु ज्ञानं न भवति ] रस ज्ञान नहीं है, [यस्मात् तु ] क्योंकि [रसः किंचित् न जानाति ] रस कुछ जानता नहीं है, [तस्मात् ] इसलिये [ज्ञानं अन्यत् ] ज्ञान अन्य है [रसं च अन्यं ] और रस अन्य है — [जिनाः ब्रुवन्ति ] ऐसा जिनदेव कहते हैं। [स्पर्शः ज्ञानं न भवति ] स्पर्श ज्ञान नहीं है, [यस्मात् ] क्योंकि [स्पर्शः किंचित् न जानाति ] स्पर्श कुछ जानता नहीं है, [तस्मात् ] इसलिये [ज्ञानम् अन्यत् ] ज्ञान अन्य है, [स्पर्शं अन्यं ] स्पर्श अन्य है — [जिनाः ब्रुवन्ति ] ऐसा जिनदेव कहते हैं। [कर्म ज्ञानं न भवति ] कर्म ज्ञान नहीं है, [यस्मात् ] क्योंकि [कर्म किंचित् न जानाति ] कर्म कुछ जानता नहीं है, [तस्मात् ] इसलिये [ज्ञानम् अन्यत् ] ज्ञान अन्य है, [कर्म अन्यत् ] कर्म अन्य है — [जिनाः ब्रुवन्ति ] ऐसा जिनदेव कहते हैं। [धर्मः ज्ञानं न भवति ] धर्म (अर्थात्
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