भजनमाळा ][ १०१
मैना सुंदरी इक नारी थी, कोढी पति लखी दुःखियारी थी;
नहीं पडे चैन दिनरैन व्यथित अकुलानी....
फल पायो मैना० १
जो पतिका कष्ट मिटाउंगी, तो उभय लोक सुख पाउंगी;
नहीं अजागल स्तनवत निष्फल जिंदगानी...
फल पायो मैना० २
इक दिन गई जिन मंदिरमें, दर्शन करी अति हर्षी उरमें;
फिर लखे साधु निर्ग्रंथ दिगंबर ज्ञानी.....
फल पायो मैना० ३
बैठी मुनि को करी नमस्कार, निज निंदा करती बारंबार;
भरी अश्रु नयन कही मुनिसों दुःखद कहानी....
फल पायो मैना० ४
बोले मुनि पुत्री धैर्य धरो, श्री सिद्धचक्र का पाठ करो;
नहीं रहे कुष्ट की तनमें नाम निशानी....
फल पायो मैना० ५
सुनि साधु वचन हर्षी मैना, नहीं होय झूठ मुनिके वैना;
करी के श्रद्धा श्री सिद्धचक्र की ठानी....
फल पायो मैना० ६
जब पर्व अठाई आया है, उत्सवयुत पाठ कराया है;
सबके तन छिडका यंत्र न्हवन का पानी....
फल पायो मैना० ७