भजनमाळा ][ ११३
श्री महावीर – भजन
महावीर तेरे दर्श बिन दिल दास का बेकार है,
नाथ मुझको तार जलदी आपका इकरार है. १
आप जैसी शांत मुद्रा तीन लोकमें नहीं,
फिर आपकी सेवासे किस को कब भला इन्कार है. २
मोह वश अज्ञानता से भूल भारी हो गई,
प्रभु अब तो तेरी शरण मुझे मुक्तिका विश्वास है. ३
राग-द्वेष की बेडियोंने कसके जकडा है मुझे,
नाथ चरणों आ पडा हूं तुं जीवन आधार है. ४
लीला प्रभु अद्भुत तेरी कौन मुखसें गाय हम,
डूबती नैयां का तूंही मोक्षमग पतवार है. ५
होऊं भव भव स्वामी सेवक जोड कर विद्या विनय,
विघ्न टरता दुःख हरता तूंही जगदाधार है. ६
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श्री वीर जिन स्तवन
भूलना ना... पार करो....ना करो.....
डूबना ना....पार करो.... ना करो....
अबतक फिरा मैं बहुत मारा मारा,
जो जो किये अपराध तुमसे छाना ना...भूलाना ना. १