Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 113 of 208
PDF/HTML Page 123 of 218

 

background image
भजनमाळा ][ ११३
श्री महावीरभजन
महावीर तेरे दर्श बिन दिल दास का बेकार है,
नाथ मुझको तार जलदी आपका इकरार है.
आप जैसी शांत मुद्रा तीन लोकमें नहीं,
फिर आपकी सेवासे किस को कब भला इन्कार है.
मोह वश अज्ञानता से भूल भारी हो गई,
प्रभु अब तो तेरी शरण मुझे मुक्तिका विश्वास है.
राग-द्वेष की बेडियोंने कसके जकडा है मुझे,
नाथ चरणों आ पडा हूं तुं जीवन आधार है.
लीला प्रभु अद्भुत तेरी कौन मुखसें गाय हम,
डूबती नैयां का तूंही मोक्षमग पतवार है.
होऊं भव भव स्वामी सेवक जोड कर विद्या विनय,
विघ्न टरता दुःख हरता तूंही जगदाधार है.
श्री वीर जिन स्तवन
भूलना ना... पार करो....ना करो.....
डूबना ना....पार करो.... ना करो....
अबतक फिरा मैं बहुत मारा मारा,
जो जो किये अपराध तुमसे छाना ना...भूलाना ना. १