Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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११८ ][ श्री जिनेन्द्र
श्री जिनेन्द्रभजन
म्हारुं मन रह्युंजी लूभाय...प्रभुजी सुं मन रह्युंजी लुभाय....
वीतरागी छबी नीरख रावरी मिथ्या देव दीये छिटकाय....१
तुम पद पंकज को प्रभु अब में सेउं मन-वच-तनडो लगाय....२
तुम हो जगत के बांधव प्रभुजी बिन कारण सबको सुखदाय...३
तुम को दीन दयाल जानकर बलदेव शरन गही तोरी आय....४
प्रभुजीसे लागे नैन
तुमसे लागे नैन हमारे....तुमसे लागे नैन हमारे...
निशदिन घडी पल लगी रहत लौ नेक न चाहत प्यारे....१
होत हर्ष अति निरख निरख छबि दर्श देख प्रभु तारे....२
बलदेव भवभव यह जांचत मोहे दीजे दर्श तिहारे....३
श्री जिनेन्द्र स्तुति
प्यारी लागे छे म्हने त्हारी बतियां सैयां....
दूर होत मिथ्यात अंधेरो,
निज परिणतिकी बढत लतियां.....सैयां...
सम्यग्ज्ञान जग्यो उर अंतर,
विषय संग छूटत लतियां...सैयां...
राम कहे तुम वदन विलोकत,
जोवत शिव सुंदर बतियां....सैयां...