भजनमाळा ][ ११९
जिनेन्द्रदेव वंदन
नैनां लाग रहे मोरे जिन चरनन की ओर....
निरखत मूरत तेरी नैनां जैसे चन्द्र चकोर...
जैसे चातक चहत मेघकुं घन गरजत जिम मोर....
ज्ञान कहे धन भाल हमारा वंदे दोउं कर जोर....
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श्री ´षभदेव स्तुति
द्रगनभर देखन दे मुखचंद....द्रगनभर......
माता मोरा देव्या धन तुम जाया ॠषभ जिनंद....
जाके दरशन तें सुख उपजे मिट जावे दुःख फंद....
वाके मुख पर वारुं मैं हितकर ‘चिरंजी रहो तेरा नंद’....
द्रगन भर देखन दे मुखचंद्र.....
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— अनंत चतुर्दशी प्रसंगे —
श्री जिनेन्द्र – स्तवन
आज अनंत चतुर्दशी दिन छे रे.....
ए व्रत अहो अणमूल
आज दीठा जिनेन्द्र भगवानने रे.... १
अनंत आनंद प्रगटो मुज अंतरे रे,
ए चैतन्य स्वरूप अद्भुत....आज.... २