१२० ][ श्री जिनेन्द्र
अनंत अनंत गुणोमां प्रभु झूलता रे,
तारी भक्ति करुं दिनरात....आज.... ३
धन्य धन्य आचार्य मुनिवृंदने रे,
नित्य आतममां रमनार....आज.... ४
एवो अपूर्व दिन क्यारे आवशे रे,
अहो! लईए संयमना पंथ....आज.... ५
ज्यारे थशे रत्नत्रय एकता रे,
दिन रात अहो ए धन्य....आज.... ६
जिनदेवे क्षमादि प्रगटावीया रे,
ए आत्म व्रतो अणमूल....आज.... ७
प्रभु केवळ ज्योति जळहळे रे,
जिनराज कृतकृत्य स्वरूप....आज.... ८
हुं तो नजरे नीहाळुं जिनेन्द्रदेवने रे,
मुज दीलडे वसों जिनदेव....आज.... ९
मुज मनमंदिरे जिननाथ छो रे,
प्रभु चाल्यो आवुं छुं तुज पास....आज.... १०
गुरुदेव कृपा वरसावता रे,
एनी करुणा तणो नहि पार....आज.... ११
गुरुराज प्रतापे जिन देखशुं रे,
प्रभु राचशुं चिदातम मांही....आज.... १२
देव गुरुनी समीपता पामशुं रे,
जेथी पामशुं पूर्णानंद....आज.... १३
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