Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१२२ ][ श्री जिनेन्द्र
ज्ञानी गुरुकी वाणी
(रागषटरस)
सुने हम बैन श्री गुरु ज्ञानीसे...सुने हम वैन...
सब तत्त्वन में सार हैजी आतमा, ज्यों मुख उपर नैन...१
याही लखै सबही लखैजी, या बिन नांही मिले सुखचैन....२
याकी महिमा को कहेजी, जाकुं ध्यावत मुनि दिन रैन....३
पारस ध्यावो तास को जी, पावो शिव भाखी जिन वैन....४
भकित
(रागबिलावल)
या मानुष भव रत्न द्वीपमें श्री अर्हंत भक्ति इक सार....
पाप विनाशे, पुन्य प्रकाशे, भव सागर तें करत उद्धार....
तुमरे नाम सुने जो निशदिन भव सागर तें उतरे पार....
पारस भक्ति धरे है निश्चे होता मुक्तित्रिया भरतार.....
श्री जिनेन्द्र स्तवन
बिन देख्यां रह्यो नहीं जाय.......
जिनजी की लाग छबी प्रभुजी लाग छबी प्यारी....बिन देख्यां,
सहस्र नेत्र कर मघवा निरखत
तो हुं तृपत नहीं थाय....