सब तत्त्वन में सार हैजी आतमा, ज्यों मुख उपर नैन...१
याही लखै सबही लखैजी, या बिन नांही मिले सुखचैन....२
याकी महिमा को कहेजी, जाकुं ध्यावत मुनि दिन रैन....३
पारस ध्यावो तास को जी, पावो शिव भाखी जिन वैन....४
पाप विनाशे, पुन्य प्रकाशे, भव सागर तें करत उद्धार....
तुमरे नाम सुने जो निशदिन भव सागर तें उतरे पार....
पारस भक्ति धरे है निश्चे होता मुक्तित्रिया भरतार.....