१२४ ][ श्री जिनेन्द्र
मुनि अर्जिका सभामांहे सोहता रे,
सोहे नरपति सुरपति वृंद....अहो.... ७
दिव्यध्वनि छूटे दिव्यता भरी रे,
गगने देवदुंदुभि नाद....अहो.... ८
चक्रेश सुरेश गणनाथ छो रे,
प्रभु त्रण भुवन आधार....अहो.... ९
एवा जिन विदेहमां बिराजता रे,
अनंत गुण रत्नत्रय नाथ...अहो.... १०
कुंद देव विदेहक्षेत्रे गया रे,
एना हृदये वसे जिननाथ...अहो.... ११
जिन देखी विरह दुःख मेटिया रे,
प्रभु दर्शन थतां उल्लास...अहो... १२
एवा कुंद प्रभु मुज आंगणे रे,
संत चरणे वंदन हो अनंत....अहो.... १३
श्री गुरुजी प्रतापे सहु देखिया रे,
भवभ्रमण मेट्या छे आज...अहो.... १४
गुरुदेवे ॐकार सुणावी रे,
पामरने उतार्या पार....अहो.... १५
देव गुरु महिमा अद्भुत छे रे,
तुज भक्ति होजो दिनरात....अहो.... १६
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