Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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भजनमाळा ][ १२५
श्री जिनेन्द्र स्तवन
(रागः मंड)
म्हारा तो नैनां में रही छाय जिनंद थांकी मूरत....(टेक)
जो सुख मो उर मांही भयो है सो सुख कह्यो न जाय..म्हारा.१
उपमा रहित बिराजत हो तुम मोपे वरणी न जाय,
ऐसी सुंदर छबी जाके ढिग कोड मदन छिप जाय....म्हारा.
तन मन धन निछरावल कर के भक्ति करुं मन लाय,
यह विनति सुन लेउ नवल की जामन मरण मिटाय..म्हारा.
श्री नेमिनाथभजन
(रागः मंड)
प्यारा म्हानें लागो छो जी नेम कुंवार....(टेक)
सूरत थांकी सोहनी जी देखत नैन संवार,
ओर बडाई थांकी कांई करुंजी पुन्य बढे अघ जाय...प्यारा. १
भोग रोग सम जान के दिये सर्व छिटकाय,
बालपने दीक्षा धरी सब जग अथिर लखाय....प्यारा. २
निज आतमरस पीयके भये त्रिभुवन के राय,
तुम पद पंकज को सदा नवल नमें शिरनाय...प्यारा. ३