१२६ ][ श्री जिनेन्द्र
श्री नेमिजिन – भजन
(छंदः रेखता)
गिरनार गया आज मेरा नेम दे दगा,
जिनंद विना क्या करुं दिल श्याम से लगा....(टेक)
बलभद्र कृष्ण जादवा सब साथ ले सगा,
व्याहन कुं सज के आये जिन के लार सुर खगा....गि. १
पशुवन की सुन पुकार त्याग दिलमें है जगा,
चले छोड पशु बंध संयम ध्यान में पगा....गि. २
नेमिनाथ छोड जब गीरनार चल गया,
तब राजमति ने भी घरबार को तजा.....गि. ३
करुणा निधान स्वामी पशु खुला कर दिया,
तकसीर विना छोड चले हम को क्यों पिया....गि. ४
तुम तो हो मेरे नाथ आठ भवकी में त्रिया,
सो ही नेम आज हम से छांडि क्यों दिया...गि. ५
कहे नेम यह संसार सब असार है त्रिया,
यह सुन के राजुल भूषण डार सब दिया.....गि. ६
नेमिनाथ छोड जब गिरनार चल गया,
तब राजमती ने भी घरबार को तजा....गि. ७
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