Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१२८ ][ श्री जिनेन्द्र
श्री नेमिनाथजिन स्तवन
(रागः ख्याल)
आज यहां जिनदर्शन मेला है.....................!
नगर द्वारका जन्म लियो है सुरपति आय उछाव कियो है,
समुदविजय शिवादेवीका नंदन तीनुं ज्ञान धरेला है,
....टेक
ऐरावत हस्ती आया है, लखि जोजन एक सवाय है,
इन्द्राणी महल पठाया है, जिनराजकुं गोद लगाया है;
समुदविजय शिवादेवी के घर जय जय कार हुआ,
सब देव अपसरा हर्ष भई जहां तांडव नृत्य करेला है
....आज० (१)
ले मेरु शिखर पहुंचाया है, सिंहासन पर पधराया है,
क्षीरोदधि देव पठाया है, जल हाथूंहाथ मंगाया है;
सौधर्म अरू ईशान इन्द्र सहस्र
अठोत्तर भूज करके,
वसु एक सु चार प्रमाण तहां, जहां मघवा कलश ढूरेला है
आज० (२)
इक दिन सभा विस्तारी है, जहां पांडव हर गिरधारी है,
जहां बात चली बलकारी है, तहां अंगुरी सांसर डारी है;
सब ही जोधा मिल खींचत है, तहां कृष्ण गोपका मुसकत है,
हरि हर्ष धार मनमें विलखे, अब कारन कौन करेला है
.....आज० (३)