नगर द्वारका जन्म लियो है सुरपति आय उछाव कियो है,
समुदविजय शिवादेवीका नंदन तीनुं ज्ञान धरेला है,
इन्द्राणी महल पठाया है, जिनराजकुं गोद लगाया है;
समुदविजय शिवादेवी के घर जय जय कार हुआ,
सब देव अपसरा हर्ष भई जहां तांडव नृत्य करेला है
क्षीरोदधि देव पठाया है, जल हाथूंहाथ मंगाया है;
सौधर्म अरू ईशान इन्द्र सहस्र
जहां बात चली बलकारी है, तहां अंगुरी सांसर डारी है;
सब ही जोधा मिल खींचत है, तहां कृष्ण गोपका मुसकत है,
हरि हर्ष धार मनमें विलखे, अब कारन कौन करेला है