भजनमाळा ][ १२९
बलभद्र कृष्ण बतलाया है, गोपियन कुं जाय शिखाया है,
उग्रसेनसुं नेह लगाया है, प्रभु व्याह कबूल कराया है;
छप्पनकोडि जादु सब मिलके, सजि चाले जूनागढकुं,
जहां तोरण पर गये नेम प्रभु, तहां देख्या प्रभु सकेला है
आज० (४)
प्रभु द्वादश भावना भाया है, गीरनारी पे ध्यान लगाया है,
तहां घातिया कर्म खिपाया है, प्रभु केवलज्ञान उपाया है;
आप मुक्ति का राज किया मैं शर्न आपकी आन लया;
करि इन्द्र चन्द्र कर जोर कहें मोहें जगसे पार करेला है.
आज० (५)
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श्री वीरजिन स्तवन
प्रभु वीर जिनेन्द्र आज जनमीया रे,
मंगळ दिन ऊग्यो आज....वीर जन्मकल्याणक आजनो रे
कुंडलपुर नगरी सोहामणी रे,
पिता सिद्धार्थ त्रिशला मात....वीर जन्म १.
रत्नवृष्टि सोहे कुंडलपुरे रे,
वळी सोहे पिताजीने द्वार....वीर जन्म २.
इन्द्र केरा इन्द्रासन डोलिया रे,
आव्यां शची अने शक्रेन्द्र....वीर जन्म ३.
कुंडलपुरे देवो ऊतर्या रे,
चौ दिशे वाजिंत्र केरा नाद....वीर जन्म ४.