गुरुदेवका जन्मोत्सव
धन्य धन्य दिन आज....समय यह कैसा प्यारा है...समय०
कहान गुरु जन्मोत्सव में जग उमटा सारा है....हां हां जग०
विमल सम्यक् दर्शन धारी, परम ज्ञान, वैराग है भारी,
जय जय जय सर्वत्र जिन्होंका बजा नगारा है...जिन्होंका० १
सीमंधर के नंद दुलारे, धर्म दीवाकर से उजियारे,
जिन शासन के विमल गगन तुम दिव्य सितारा है...गगन० २
अजोड वक्ता जैनधरमका, आतम रक्षक अम भक्तोंका,
सफल हुआ सौभाग्य पाय तुम चरण सहारा है...हां हां तुम०३
उजमबा के लाल दुलारे सुवर्ण नगर के चमकित तारे,
जन्मोत्सवका आज गगनमें बाजां बाजे रे....गगनमें० ४
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श्री साधाु – स्तवन
(ओ...नाथ! अरज टूक सुनियो रे...)
हे साधु हृदय मम वसियो जी मेरे पातक हरियो जी....
वहां गगनमें दीपै चंद्रमा यहां मुनि दीक्षा धारी,
अनुकंपासे जिनकी मिटती मोहरूप बिमारी...
हे वैद्य महर टूंक करियो जी.....मेरे १
भजनमाळा ][ १३९