यह तन अथिर जानकर तुमने तजदी जगकी माया,
उस माया से बचने हेतु मैं पास तुम्हारे आया....
सद्भाव मेरे उर भरियो जी...मेरे. २
आतम ध्यान लगाते निशदिन सद्उपदेश सुनाते,
स्वयम् तिरे भवसागरसे हमको पार लगाते....
गुरु ‘वृद्धि’ को न विसरीयो जी....मेरे. ३
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श्री मुनिराज – स्तुति
(मारा नेमि पिया गिरनारी चाल्या.....)
मारा परम दिगंबर मुनिवर आया सब मिल दरशन कर लो हां०
बार बार आनो मुशकिल छे भाव भक्ति उर भर लो....हां०
हाथ कमंडल काठ को पींछी पंख – मयूर,
विषय आश आरंभ सब परिग्रह से है दूर;
श्री वीतराग विज्ञानी को कोई ज्ञान हिया बिच धर लो....हां० १
एक वार कर पात्रमें अन्तराय दोष टाळ,
अल्प अहार हो ले खडे नीरस रसधार तोष;
सौभाग्य तरण तारण मुनिवर का तारण चरण पकड लो...हां० २
चारों गति दुःख से डरी आत्मस्वरूप को ध्याय,
पुण्य-पाप से दूर दूर ज्ञान – गुफामें आय;
ऐसे मुनि मारग उत्तम धारी तिनके चरण नमूं मैं....हा० ३
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१४० ][ श्री जिनेन्द्र