ऐसे परम तपोनिधि जहां जहां जाते है...जाते है;
परम शांति सुख लाभ जीव सब पाते है...पाते है;
भवभवमें सौभाग्य मिले, गुरुपद पूजुं ध्याउं
गुरुपद पूजुं ध्याउं
वरुं शिवनारी...नारी...वरुं शिवनारी. ४
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श्री मुनिराज – भजन
(एक तूंही आधार हो जगमें...ओ मेरे भगवान....की...)
धन्य मुनीश्वर आतम हितमें छोड दिया परिवार.....कि......
तुमने छोडा सब घरबार......!
धन छोडा वैभव सब छोडा समझा जगत असार.....कि
तुमने छोडा सब संसार......
कायासे ममताको टारी, करते सहन परिषह भारी;
पंच महाव्रत के हो धारी, तीन रतन के बने भंडारी;
आत्म स्वरूपमें झूलते करते निज आतम उद्धार.....कि
तुमने छोडा सब घरबार.....धन्य० १
राग द्वेष सब तुमने त्यागे वैर विरोध हृदयसे भागे,
परम आतम के अनुरागे, वैर कर्म पलायन भागे,
सत्सन्देश सुना, भविजनका करते बेडा पार.....कि
तुमने छोडा सब संसार.....धन्य० २
होय दिगंबर वनमें विचरते निश्चल होय ध्यान जब धरते,
निजपदके आनंदमें झूलते उपशमरसकी धार बरसते,
१४२ ][ श्री जिनेन्द्र