मुद्रा सौम्य नीरख कर वृद्धि नमता वारंवार....कि
तुमने छोडा सब घरबार....धन्य० ३
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श्री मुनिराज – स्तुति
ऐसे मुनिवर देखें, वनमें.....(२)
जाके राग – द्वेष नहीं तनमें.......
ग्रीष्म ॠतु शिखर के उपर.....(२)
मगन रहे ध्याननमें......१
चातुर्मास तरुतल ठाडे......(२)
बुंद सहे छिन छिन में......२
शीतमास दरिया के किनारे......(२)
धीरज धारे ध्याननमें......३
ऐसे गुरुको मैं नित प्रति ध्याउं......(२)
देत ढोक चरणनमें.......४
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कहानगुरुका जन्मोत्सव
(राखना रमकडाने....)
गुरुकहानना ए जन्मने हां...भक्तो सौ भावे ऊजवे रे....
जयजयकार गजावी आजे मंगलनादे वधावे रे....ए....
— कहानना ए जन्मने....१
भजनमाळा ][ १४३