द्युति विभूति विज्ञान विशेषता, बल अनंत सुशक्ति अशेषता;
असमरूप उदार समंकरं, अपरदेव नहीं तुम तें परं. ८
करन तात सुवृक्ष अनंद हो, सुभग मात सुतारा-नंद हो;
लसत है गज लक्षन सोहनो, सुभग रुप त्रिलोक विमोहनो. ९
यह कृपा युगमंधर कीजीए, दरश मोहि प्रतक्ष जु दीजिए;
तुम कहावत दीनदयाल हो, करि यही हमरी प्रतिपाल हो. १०
( धत्ता छंद )
जय जय जगसारं, विगत विकारं, सुखित अपारं, जित मारं;
हनि अघ जंजारं, सुनहु पुकारं, युगमंधर भव भयहारं.
( अडिल्ल छंद )
युगमंधर कुं यजत सजत सुखसार है,
तजत संग दुर्बुद्धि सु सुमति अपार है;
सुरतिय लोचन भ्रमर कंज मुख तासको,
होत भवन परिपूर अमल यश जासको.
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[३]
श्री बाहुजिन – स्तवन
( दोहा )
अनुभव सुमन सुयोगतें, उपजी सरस हिलोल,
किये दूर परमल सकल, सरसत सुगुन किलोल.
१५६ ][ श्री जिनेन्द्र