Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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पुनि पारिणामिक सु भाव तीन,
जीवत भव्यत्व अभव्य लीन.
इनमें उदयिक भावनि प्रचार,
परिवर्तन पंच किये अपार;
भुगते मैं कष्ट अनादि देव,
तिनको तुम पार लयो स्वमेव. १०
इनतें उबारि लखि दीन मोहि,
यह अरज करत है ‘थान’ तोहि;
परपरिणति तें मनको हटाय,
निजरूप हमें दीजे दिखाय. ११
( लीलाकर छंद )
धारें जगाधीशके वैनकुं जो हिए मांहि,
छारें सरूपी तने पारिणामी उदै ताहि;
वारें चतु द्रव्यके पारिणामी भली भांति,
सोही लहे सौख्य जोही गहे आपनी जाति.
( अडिल्ल छंद )
ॠषभानन जग जान यजत नर जो सही,
टरे सकल दुःख द्वंद वर अनुभव मही;
मुक्ति महीरुह मंजु तहां लहलात है,
अनुपम सौख्य अनंत सुरस फल पात है.
१६८ ][ श्री जिनेन्द्र