Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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ये उद्धार पल्य मन आनि, दीप उदधि संख्या हितजाणी;
याके रोम पुंज है जिते, कोडा कोडी पचीस जु तिते.
वरस एक शतके पुनि जान, समय करे आगम परमान;
रोम उद्धार पल्यकी राशि, करो घात तिन बुद्धि प्रकाश.
ते दश कोडा कोडी प्रमाण, श्रद्धा सागर होत महान;
थिति प्रमान यातें कर जोय, ये तुम वैन जिताई सोय.
ज्ञान दर्शनावरण द्वि मान, वेदनी अंतराय पुनि जान;
करे बंध उत्कृष्ट जु चार, कोडा कोडी तीस दधि सार. १०
सीत्तेर कोडा कोडी प्रमाण, सागर परे मोहनि थिति जान;
कोडा कोडी वीस दधि होय, नाम गोत्र की पर थिति जोय. ११
है तेतीस उदधि परमान, आयु कर्म की पर थिति जान;
अपर आयु वेदनी विधि दोय, थिति द्वादश मुहूर्त अवलोय. १२
नाम गोत्र दोउ विधि जाय, वसु मुहूर्त थिति अल्प प्रमान;
ज्ञान दर्शनावरण जु दोय, मोहनी विघ्न आयु पुनि सोय. १३
थिति अंतर्मुहूर्त इक मान, ये तुम भाषित है भगवान;
भुगती मैं परिवर्तनरूप, सो सब तुम जानतु जगभूप. १४
ह्वै भयभीत शरण तुम ग्रही, इनतें वेग छुडावो सही;
दीन दयाल दयानिधि नाम, अव विलंब करनो किहि काम. १५
१७० ][ श्री जिनेन्द्र