Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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व्रत संयम भाव हिये धरिये, समतारस पूरी सुखी करिये;
परिपावन ये हम जाचत हैं, तुम सेव सदा अभिलाषत हैं. १२
( देवराज छंद )
हटे कुभाव की घटा सुज्ञान भान को प्रकाश होत है,
हुवे समग्र सिद्ध काज उग्र पुण्य के समाज सो लहे;
दिवेश वेलि के समान अप्रमान सौख्यदान है यही,
करे जिनेश की सु भक्ति ह्वै त्रिदोष तें विमुक्त जो सही.
( अडिल्ल )
सूर प्रभु जिन तनी सुखद जयमाल है,
शुभ संचय करतार अशुभ को साल है;
धरे ज्योति मनु परम कलानिधि की कला,
कुमुद ज्ञान विकसान तिमिर दुरमतिदला.
[१०]
श्री विशालकीर्ति जिनस्तवन
( कवित छंद )
कीरति विशाल है विशाल वर भाल जास,
मोचन कलंक लसे लोचन विशाल है;
बली बल मोह के असंख्य बल दलिवेकुं,
बल बलिखंड भुजदंड को विशाल है.
भजनमाळा ][ १७३