हुवे समग्र सिद्ध काज उग्र पुण्य के समाज सो लहे;
दिवेश वेलि के समान अप्रमान सौख्यदान है यही,
करे जिनेश की सु भक्ति ह्वै त्रिदोष तें विमुक्त जो सही.
मोचन कलंक लसे लोचन विशाल है;
बली बल मोह के असंख्य बल दलिवेकुं,
बल बलिखंड भुजदंड को विशाल है.
Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).
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