Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 179 of 208
PDF/HTML Page 189 of 218

 

background image
मिले सत संगति ही सुखरास, हुवे जब लों शिव ‘थान’ निवास;
अहो! जिन जाचत है हम तोहि, अजाचकता पद दे अब मोहि.१८
( शिखरिणी छंद )
सुसीमाख्यं रम्यं जनमपुर शोभा वरयुतं,
पिता पूर्णं क्रांति पदमरथ नामा क्षितिधरं;
प्रभारंभाहारी जननी जगत्राता सरस्वती,
जयो कंबू केतु प्रणत भयहा वज्रधर! त्वम्.
( अडिल्ल छंद )
करत वज्रधर देव तनें गुणगान कुं,
ततछिन देत उडाय कुमति के मान कुं;
करत सुगति संबंध बंध विधि कुं हरे,
अमल अचल सुख पूर मुक्ति पदवी धरे.
[१२]
श्री चंद्रानन जिनस्तवन
(दोहा)
विमलभाव सोडश कला, पूरित अति द्युतिवंत;
वचन सुधा सीकर नीकर, भविगन अमर करंत.
भजनमाळा ][ १७९