Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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(चोपाई १६ मात्रा)
भरमभाव वय बाल विताई, निजरसभास तरुनता छाई;
शोभा सरस अंग वसु बाढी, रची प्रीति शिवतियसें गाढी.
मज्जन मल पर भाव उतारे, केश सघन रुचि रुचिर संवारे;
सम्यक् दरश मुकुट शिर छाजे, उद्यम भाल तिलक वर राजे. २
बंधुर वसन दशुं दिश राजे, दश वृष भेष मुद्रिका छाजे;
शक्ति विकास सुंगध महकावे, द्विविध धर्म कुंडल दरसावे. ३
नययुग लसत पादुका दोउ, ध्यान कृपान चंड अरि खोउ;
सुभग शील पटका छबि छाजे, भेदबुद्धि असितनुजा राजे. ४
वर विद्यायुत श्रीमुख सोहे, रचित तमोल राग वृष जू है;
वस्तु दिखावन सत्यमुख वानी, निज हित चतुर सकल सुखदानी. ५
इम षोडश श्रृंगार संवारे, वर विराग केयूर सु धारे;
द्रढ प्रतीति भुजबंधन राजे, सुमन सुमन माला उर छाजे. ६
सो वर मुक्तिरमनिका झूला, गुप्ति तीन कटिसूत्र सु मूला;
चर्या चरना भरन विराजे, सरल सुभाव छरी कर छाजे. ७
तुर्रा वर विवेक झलकावे, सुमति सेहुरा सब मन भावे;
मन मतंग असवार सु राजे, प्रभुता छत्र परम छवि छाजे. ८
चामर द्विविध दयासित सोहे, अतुल तेज त्रिभुवन मन मोहे;
अनहद ध्वनि दुंदुभि घररावे, अनुभव वर निशान फहरावे. ९
व्रत बरात संग है रंग भीनी, नृत्य करत निति ॠद्धि नवीनी;
अतिशय भाव असम दरशावे, विविध भांति भविमन ललचावे.१०
१८० ][ श्री जिनेन्द्र