Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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इम समाज संयुत जगभूपा, राजत है मुद मंगल रूपा;
शिव श्यामा वर वरगुनधारी, निजबल प्रबल सकल खल हारी. ११
पद उर धरत करत अघहानी, निजविभूति दाता वर दानी;
सुगुन रटत कोउ पार न पावे, रटत रटत तुम सम ह्वै जावे. १२
गाहि गाहि गुणसिंधु तिहारो, गणपति ज्ञान लह्यो नहि पारो;
तो कही पार कौन कवि पावे, निज भव सफल हेत गुन गावे. १३
करी कृपा वर कृपा तिहारी, हरहु धीर ! भवपीर हमारी;
थान शरन तोरी शिवनाथा, तजी विलंब करी हो शिवसाथा.१४
( कुंडलिया छंद )
सजे नगरी पावनी पुंडरीकणी जास,
वालमीकि भूपति पिता सुंदर दया निवास.
सुंदर दयानिवास दयावती माता सोहे,
वृषभचिह्न ध्वजमांही देखी सुर नर मन मोहे.
जास चरनयुग सेय सौख्य भविगनकुं साजे,
सो चंद्राननदेव ताप भवभंजन राजे.
( अडिल्ल छंद )
चंद्रानन के चरन सरोजनकुं यजे,
सजे सकलसुख आज दुःखगन सब भजे;
रसना पावन भई करत गुनगानकुं,
मिल्यो परम शिवथान आज मनुं ‘थान’ कुं.
भजनमाळा ][ १८१