Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 199 of 208
PDF/HTML Page 209 of 218

 

background image
( मालिनी छंद )
इति जिनगुणमाला, पर्म आनंद शाला,
सकल विघन टाला, शुद्धरूपा विशाला;
करि तन मन शुद्धि जो स्वरों धारी गावे,
विलसि सुख दीवाले, मुक्तिश्री सो लहावे.
( अडिल्ल छंद )
महाभद्र गुणभद्र भद्र मनतें भनें,
कर्म अद्रि चकचूरि अचल सुख सो सनें;
विलसे सुख सुरबाल कमलिनी बागमें,
रमें बहुरि चिरकाल वधूशिव लागमें.
[१९]
श्री देवयश जिनस्तवन
( दोहा )
विधि घनबिन चिद् रवि छटा, दमकिं रही द्युति एन;
छकित होत छवि निरखि के, सुन नर मुनि मन नैन.
( दोधक छंद )
तारक हो तुमही जग स्वामी, बारक भवदुःख अंतरजामी;
मौन विकास दिनेश तुंही है, शुभ्र गिराधर ईश तुंही है.
तूं विधि है चतुरानन धारी, मर्दन तूं मुर मोह मुरारी;
और कषाय विषै बसि सारे, हो तुम द्वेष दोष दुःख टारे. २
भजनमाळा ][ १९९