Shri Jinendra Bhajan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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उद्यम है अथवा मगमांहि, राह मिले शुचि सम्यक् याही;
‘थान’ लहूं जब लों शिव नीको, ये सब होहु सहाय धनीको. १४
( दोहा )
ज्यो नृपति स्तवभूत सुत, गंगा उर अवतार;
स्वस्तिक ध्वज जसु जनमथल, नगर सुसीमा सार.
( मेघस्फूर्जित छंद )
तजे शंका कांक्षा निजहितरता भाव संवेग धारें,
सजें आनंदौध पुलकितवपु शुद्धस्तुति उचारें;
लहें सो संबोधं सकलसुखदं कीर्ति भूलोक छावे,
हूवे शक्री चक्री अचल अमलं मुक्तिभूमि कहावे.
( अडिल्ल छंद )
जयो देवयश देव देवपति पूजकी,
भक्ति महासुख दैन कला शशि दूजकी;
करे सिन्धु सुखवृद्धि सिद्धि सब दायनी,
घायक सकल कलेश कलंक पलायनी.
[२०]
श्री अजितवीर्य जिनस्तवन
( दोहा )
अजितवीर्य जिनदेव तुव, पदनी रज नमी भाल;
धरि धीरज जय जस सुखद, भनूं विशद जयमाल.
भजनमाळा ][ २०१