Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ १२९
तामैं जिनबिंब बिराजमान,
सिंहासन छत्र चमर सुजान;
तोरण द्वारन मंगल सुदर्व,
कंचन रतनन सों खिचे सर्व. ६.
ताके चहुं दिस वापिका चार,
मानिन को मान गलत निहार;
ताके आगे शालिका सार,
पुष्पनि की वाडी दोउ पार. ७.
फिर दुतिय कोट कंचन सुवर्ण,
गोपुर द्वारन तोरण सु धर्म;
अष्टोत्तर सत मंगल सु दर्व,
द्वारन द्वारन निधि परी सर्व. ८.
तमें नटशाला चहुं ओर,
तहां नटै अपछरा विविध जोर;
तहां वन चारों दिशि शोभकार,
चंपक अशोक आम्रादि चार. ९.
इक इक दिश वृक्ष सु चैत्य एक,
जिन बिंबांकित पूजत अनेक;
फुनि तृतिय कोट ताए सु हेम,
ध्वज पंकति तूप सु रत्न जेम. १०.
चौथो जु फटिकमणि कोस कोट,
ताके मध द्वादश सभा गोट;