Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ १५९
कर दूर रागादिक निरंतर, आत्मको निर्मल करूं,
बल ज्ञान दर्शन सुख अतुल, लहि चरित क्षायिक आचरूं.
आनंदकंद जिनेंद्र बन, उपदेशको नित उच्चरूं,
आवैं ‘अमर’ कब सुखद दिन, जब दुखद भवसागर तरूं.
श्री जिनस्तवन
(रागछप्पय)
देखे श्री जिनराज, आज सब विघन नशाये,
देखे श्री जिनराज, आज सब मंगल आये.
देखे श्री जिनराज, काज करना कछु नाहीं,
देखे श्री जिनराज, हौंस पूरी मनमांहीं.
तुम देखे श्री जिनराज पद, भौजल अंजुलिजल भया,
चिंतामनि पारस कल्पतरु, मोह सबनिसों ऊठि गया.
देखे श्री जिनराज, भाज अघ जाहिं दिसंतर,
देखे श्री जिनराज, काज सब होंय निरंतर.
देखे श्री जिनराज, राज मनवांछित करिये,
देखे श्री जिनराज, नाथ दुख कबहुं न भरिये.
तुम देखे श्री जिनराजपद, रोमरोम सुख पाईए,
धनि आज दिवस धनि अब धरी, माथ नाथकों नाईये.
धन्य धन्य जिनधर्म कर्मकों छिनमें तोरै,
धन्य धन्य जिनधर्म परमपदसों हित जोरै.