Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ १६१
जै जै श्री जिनदेव, सेव तुमरी अघनाशक,
जै जै श्री जिनदेव भेव षटद्रव्य प्रकाशक.
जै जै श्री जिनदेव, एक जो प्रानी ध्यावै,
जै जै श्री जिनदेव, टेव अहमेव मिटावै.
जै जै श्री जिनदेव प्रभु, हेय करमरिपु दलनकौं,
हूजै सहाय संघरायजी, हम तैयार सिवचलनकौं.
जै जिणंद आनंदकंद, सुरवृंदवंद्यपद,
ज्ञानवान सब जान, सुगुन मनिखान आन पद.
दीनदयाल कृपाल, भविक भौजाल निकालक,
आप बूझ सब बूझ, गूझ नहिं बहुजन पालक.
प्रभु दीनबंधु करुनामयी, जगउधरन तारनतरन,
दुखरासनिकास स्वदासकौं, हमें एक तुमही सरन.
देखनीक लखि रूप वंदिकरि वंदनीक हुव,
पूजनीक पद पूज, ध्यान करि ध्यावनीक ध्रुव.
हरष बढाय बजाय, गाय जस अंतरजामी,
दरव चढाय अघाय, पाय संपति निधि स्वामी.
तुम गुण अनेक मुख एकसों कौन भांति बरनन करौं,
मनवचनकायबहुप्रीतिसों एक नामहीसौं तरौं.
चैत्यालय जो करैं धन्य सो श्रावक कहिये,
तामें प्रतिमा धरैं धन्य सो भी सरदहिये.
जो दोनों विस्तरैं संघनायक ही जानौं,
बहुत जीवकों धर्म-मूलकारन सरधानों.