Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१६४ ][ श्री जिनेन्द्र
श्री वीर जिनस्तवन
वंदू मैं जिनवर धीर महावीर सु सनमत,
वर्द्धमान अतिवीर वंदि हूं मनवचतनकृत;
त्रिशलातनुज महेश धीश विद्यापति वंदू,
वंदौं नित प्रति कनकरूप तनु पाप निकंदू.
सिद्धारथ नृपनंद द्वंददुख दोष मिटावन,
दुरति दवानल ज्वलित ज्वाल जगजीव उधारन;
कुंडलपुर करि जन्म जगत जिय आनंदकारन,
वर्ष बहत्तर आयु पाय सबही दुख टारन.
सप्तहस्त तनु तुंग भंगकृत जन्ममरणभय,
बालब्रह्ममय ज्ञेय हेय आदेय ज्ञानमय;
दे उपदेश उधारि तारि भवसिंधु जीवघन,
आप बसे शिवमांहि ताहि वंदौं मन वच तन.
जाके वंदनथकी दोष दुख दूरहि जावै,
जाके वंदनथकी मुक्तितिय सन्मुख आवै;
जाके वंदनथकी वंद्य होवें सुरगनके,
ऐसे वीर जिनेश वन्दि हूं क्रमयुग तिनके.
सामायिक षटकर्ममांहिं वंदन यह पंचम,
वंदों वीर जिनेन्द्र इन्द्रशतवंद्य वंद्य मम;
जन्ममरणभय हरो करो अघशांति शांतिमय,
मैं अघकोष सुपोष दोषको दोष विनाशय.