Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ १७७
क्षुधा तृषादिक सहूं परीषह, बारह भावन भाऊं; मैं वो०
सम्यग्दर्शन ज्ञान चरण तप, दशलक्षण उर लाऊं; मैं वो०
चार घातिया कर्म नाशकर, केवलज्ञान उपाऊं; मैं वो०
घात अघाति लहूं शिव ‘मकखन’, फेर न जगमें आउं; मैं वो०
श्री सिद्धस्तुति
नमौं सिद्ध परमात्मा, अद्भुत परम रसाल,
तिन गुण अगम अपार है, सरस रचों जयमाल.
(छन्द पद्धरी)
जय जय श्रीसिद्धनको प्रणाम,
जय शिवसुखसागरके सुधाम;
जय बलि बलि जात सुरेश जान,
जय पूजत तनमन हरष आन.
जय क्षायक गुण सम्यक्त्व लीन,
जय केवलज्ञान सुगुण नवीन;
जय लोकालोक प्रकाशवान,
जय केवलअतिशय हिये आन.
जय सर्व तत्त्व दरसे महान,
सोई दरसनगुण तीजो सुजान;
जय वीर्य अनंतो है अपार,
जाकी पटतर दूजो न सार.