Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 178 of 253
PDF/HTML Page 190 of 265

 

background image
१७८ ][ श्री जिनेन्द्र
जय सूक्षमता गुण हिये धार,
सब ज्ञेय लखें एक हि सुवार;
इक सिद्धमें सिद्ध अनन्त जान,
अपनी अपनी सत्ता प्रमान.
अवगाहन गुण अतिशय विशाल,
तिनके पद बंदौं नमत भाल;
कछु घाटि न बाध कहै प्रमान,
सो अगुरुलघु गुण धर महान.
जय बाधारहित विराजमान,
सो अव्याबाध कह्यो बखान;
ए वसु गुण हैं विवहार संत,
निहचै जिनवर भाखे अनंत.
सब सिद्धनके गुण कहे गाय,
इन गुणकर शोभित हैं जिनाय;
तिनको भविजन मन वचन काय,
पूजत वसुविधि अति हरष लाय.
सुरपति फणपति चक्री महान,
बलहरि प्रतिहर मनमथ सुजान;
गणपति मुनिपति मिलि धरत ध्यान,
जय सिद्ध शिरोमणि जग प्रधान.