Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ १८९
स्तवन
(रागकाफी)
आपा प्रभु जाना मैं जानाटेक.
परमेसुर यह, मैं इस सेवक,
एसो भर्म पलानाआपा०
जो परमेसुर सो मम मूरति,
जो मम सो भगवान;
मरमी होई तो जान,
जानै नाहीं आनाआपा०
जाकौ ध्यान धरत हैं मुनिगन;
पावत हैं निरवाना;
अर्हंत सिद्ध सूरि गुरु मुनिपद,
आतमरूप बखानाआपा०
जो निगोदमें सो मुझमाहीं,
सोई है शिव थाना;
‘द्यानत’ निहचै रंच फेर नहिं,
जानै सो मतिवानाआपा०
स्तवन
(रागमारु)
जो जो देख्यो वीतरागने सो सो होसी वीरा रे!
बिन देख्यो होसी नहिं क्यों ही, काहे होत अधीरा रे. जो०