Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 218 of 253
PDF/HTML Page 230 of 265

 

background image
तिन पार्श्व मांहि जुग कुंड गाय,
कंचन मणिमय दीन्हों बताय,
जो पूजन श्री जिनदेव जाय;
ते धोवत तिन जल लेय पाय. १८
इक वापी के संग कह्यो गाय,
द्वे कुंड जडित मणि शोभदाय,
है शोभा वैभव जो महान,
तिहि कौन सकै कवि करि बखान. १९
मानस्तंभ मूलहि दिशन चार,
प्रतिमा श्री जिनवर की निहार;
तिन पूज्यो सुरपति हर्ष धार,
करि नृत्य ताल स्वर को सम्हार. २०
सननं सननं बाजैं सितार,
घननं घननं ध्वनि घंड धार;
द्रम द्रम द्रम द्रम बाजत मृदंग,
करताल तबल अरु मूहचंग. २१
छम छम छम छम नूपुर बजाय,
क्षण भूमि क्षणक आकाश जाय;
जहं नाचत मघवा आप जान,
तिहि शोभा को वरणै महान. २२
इमि नृत्य गान उत्सव महान,
करि पूजा कयि आगे पयान;
२१८ ][ श्री जिनेन्द्र