Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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श्री जिनस्तवन
तेरी पल पल निरखें मूरतिया, (२)
आतमरस भीनी ये सुरतिया....तेरी०
घोर मिथ्यात्व रत हो तुम्हें छोडकर,
प्रीत कीनी है जडसे लगन जोडकर;
चारों गतिमें भ्रमण, करके जामनमरण,
लखी अपनी न सच्ची ये सूरतिया....तेरी०
तेरे दर्शन से ज्योति जगी ज्ञानकी,
पथ पकडी है हमने स्वकल्याणकी;
पद तुझसा महान, लगा आतमका ध्यान,
पावे ‘सौभाग्य’ पावन शिवगतिया....तेरी०
श्री शीतलनाथ जिनस्तवन
तेरी शीतल शीतल मूरत लख, कहीं भी नजर ना जमे
प्रभो शीतल!
सूरत को निहारें तव पल पल, छबि दूजी नजर ना जमे
प्रभो शीतल!....तेरी०
भव दुःखदाह सही हो घोर, कर्मबली पर चला न जोर,
तुम मुखचंद्र निहार मिली अब, परम शांति सुख शीतल ठोर;
निजपरका ज्ञान जगे घटमें, भव-बंधन भीड शमे.
प्रभो शीतल!....तेरी०
सकल ज्ञेयके ज्ञायक हो, एक तुम्ही जगनायक हो,
वीतराग सर्वज्ञ प्रभू तुम, निज स्वरूप शिवदायक हो;
स्तवनमाळा ][ २२३