आज मूलकी भूल मिटी है, तव दर्शन कर स्वामी;
तत्त्व चराचर लगे झलकने, घट – घट अंतरयामी;
कैसे पावें....
जामन – मरन रहित पद पावन, तुमसा नाथ सुहाया,
वो ‘सौभाग्य’ मिले अब सत्वर, मोक्ष – महल मन भाया
कैसे पावें.....
श्री जिन – स्तवन
तेरे चरणों में खडे हैं प्रभु आनके,
धार मनमें भरोसा तेरे नाम पै....
आये दुनियाको छोड, तेरी महिमा पै दोड,
करने पापोंको तोड, बनने तुझसा बेजोड....तेरे चरणोंमें.
मनकी पीडा मनही जाने, दुखिया दुनिया क्या पहिचाने,
तुम सम शांति सुधारस पाने...तेरे चरणोंमें.
तव दर्शनने बल प्रगटाया, ज्ञान – सूर्य ‘सौभाग्य’ जगाया,
जो छिपता नहिं कभी छिपाये....तेरे चरणोंमें.
श्री जिन – स्तवन
प्यारी प्यारी छबि तेरी मनको लुभाये,
मनको लुभाये तेरे चित्तको लुभाये रे....
ज्योति जगाये.
एक तो छबि तेरी परम दिगंबर,
दूजे अनुपम शान्ति सुधाकर,
स्तवनमाळा ][ २२७